निर्वाचन आयोग पक्षपाती, भाजपा की जान ईवीएम में: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह
अविनाश सुरेश
- 15 Dec 2025, 10:05 PM
- Updated: 10:05 PM
नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में सोमवार को निर्वाचन आयोग और भाजपा-नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाया। उन्होंने, साथ ही, भाजपा के बारे में कहा कि उसकी जान इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बसती है।
चुनाव सुधारों पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य सिंह ने आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने उससे समय मांगा तो उन्हें समय देना तो दूर पावती तक नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई राज्यों में वोट चोरी होने का प्रमाण दिया है, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी बिहार में सरकार के कदमों पर रोक नहीं लगायी गयी, जबकि कई राज्यों में सरकार के कदमों पर रोक लगा दी गयी थी।
सिंह ने कहा कि दलबदल होने पर या पार्टी में विवाद होने पर उसके चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी जाती है, लेकिन शिवसेना का चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे और राकांपा का चुनाव चिह्न अजित पवार को दे दिया गया।
सिंह ने कहा कि दल-बदल करने वाले नेताओं को छह साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि दक्षिण और उत्तर भारत की सीटों के मौजूदा अनुपात के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव सुधारों पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया।
सिंह ने कहा कि लोकसभा में शाह ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें निर्वाचन आयोग ने सूचित किया था कि चुनाव सुधारों के बारे में उसे कोई सुझाव नहीं मिला। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि इस संबंध में या तो आयोग ने गुमराह कर गृह मंत्री से गलतबयानी करायी या गृह मंत्री ने सदन को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि दोनों स्थिति में कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कहा है कि 2014 के बाद से देश के सभी संवैधानिक संस्थाओं पर एक विचारधारा के लोगों को बैठाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में तानाशाही लागू हो रही है और विभिन्न देशों में तानाशाहों ने बार-बार चुनाव जीतने का दावा करते हुए संस्थाओं पर कब्जा कर लिया था।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के औचित्य पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा कि आयोग साल में चार बार संक्षिप्त पुनरीक्षण कराता है तो फिर एसआईआर की क्या जरूरत है।
उन्होंने मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करते हुए कहा कि अगर ईवीएम से ही चुनाव हो तो हर मतदाता को ‘‘वीवीपैट’ पर्ची दी जानी चाहिए। उन्होंने देश में एक साथ चुनाव कराए जाने का भी विरोध किया।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसे विश्व का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन कहा है, लेकिन सवाल यह है कि आरएसएस पंजीकृत भी है या नहीं। भाजपा सदस्यों की टोकाटोकी के बीच उन्होंने सवाल किया कि क्या अमित शाह आरएसएस के कभी सदस्य रहे हैं।
इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री शाह ने लोकसभा में इस संबंध में स्पष्ट कहा है कि वह आरएसस के हैं और इसका उन्हें गर्व है।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सामिक भट्टाचार्य ने अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2005 के एक भाषण का हवाला देते हुए दावा किया कि सिंह ने कहा था, "भारत, देश में किसी भी प्रकार के अवैध प्रवासन का विरोधी है, चाहे वे बांग्लादेश से हों या कहीं और से (आए हों)। अवैध प्रवासन को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, और मौजूदा एसआईआर को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और जनसांख्यिकीय असंतुलन का मुद्दा भी उठाया।
आम आदमी पार्टी के संदीप कुमार पाठक ने चुनाव में भारी खर्च का मुद्दा उठाया और कहा कि आम नागरिक चुनाव नहीं लड़ सकता है। उन्होंने मतदाता सूची के उचित सत्यापन का भी सुझाव दिया।
निर्दलीय कपिल सिब्बल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खुद कानून लाते हैं और उसका हथियार बनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सुधार तो लाते हैं, लेकिन उसी का दुरुपयोग करते हैं। जो प्रमुख सुधार आपने किया, आप उसका भी उल्लंघन करते हैं।’’ उन्होंने चुनाव में धन बल को लेकर भी चिंता जतायी।
भाषा अविनाश