बहुपक्षीय मंचों पर पाकिस्तान की ओर से कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाना बेतुका और अवांछित : भारत
रंजन
- 24 Jul 2026, 01:38 AM
- Updated: 01:38 AM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) भारत ने पाकिस्तान के विदेशमंत्री इसहाक डार द्वारा मनीला में आसियान से जुड़ी एक बैठक में कश्मीर और सिंधु जल संधि का निलंबित का मुद्दा उठाने पर बृहस्पतिवार को पड़ोसी देश को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस्लामाबाद झूठ फैलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के अपने रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने की कोशिश करता है।
डार ने आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) के मंत्रियों की बैठक में कहा कि सिंधु जल संधि के निलंबन के मामले को बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए सुलझाया जाना चाहिए।
इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''भारत पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री की बेबुनियाद और अवांछित टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज करता है।''
उन्होंने कहा,''इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर एक बहुपक्षीय मंच का इस्तेमाल झूठ फैलाने, सरकार-समर्थित गलत जानकारी का प्रचार करने और सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के अपने जग-जाहिर रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने के लिए किया है।''
जयसवाल ने यह टिप्पणी पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री डार बयान को लेकर संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में की।
उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। पाकिस्तान को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।''
जयसवाल ने कहा कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत अपने रुख पर कायम है।
भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमले और 26 आम लोगों के मारे जाने के तुरंत सिंधु जल संधि को निलंबित करने सहित कई कड़े कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने,जिसमें पहलगाम का कायराना हमला भी शामिल है के जवाब में सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है।''
जयसवाल ने कहा कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान 'सीमा-पार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और पक्के तौर पर छोड़ नहीं देता'।
उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान की उस हरकत की भी कड़ी निंदा की है जिसके तहत वह ''आधिकारिक तौर पर प्रायोजित गलत जानकारी'' फैलाता है, जिसे अक्सर 'फितना-अल-हिंदुस्तान' जैसे धार्मिक शब्दों का जामा पहनाया जाता है।
जायसवाल ने कहा, ''यह पाकिस्तानी तंत्र की ओर से अपने आंतरिक संकटों और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अपनी साबित हो चुकी भूमिका से ध्यान भटकाने की एक बेकार कोशिश है।''
उन्होंने कहा, ''अपने पड़ोसियों पर उंगली उठाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों का गलत इस्तेमाल करने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर यही होगा कि वह अपनी जमीन पर मौजूद आतंकवाद के ढांचे को खत्म करे और अपने घर को ठीक करे।''
पाकिस्तानी अधिकारी उन आतंकी समूहों का वर्णन करने के लिए 'फितना-अल-हिंदुस्तान' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्हें भारत का समर्थन प्राप्त है।
भाषा धीरज रंजन
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