बिहार में प्रदूषित नाले के पानी से सब्जियां उगाया जाना अत्यंत चिंताजनक: मंत्री
जोहेब
- 22 Jul 2026, 07:06 PM
- Updated: 07:06 PM
पटना, 22 जुलाई (भाषा) बिहार सरकार ने शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रदूषित नाले के पानी से सब्जियां उगाए जाने और उसके सेवन से लोगों के गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की आशंका को अत्यंत चिंताजनक मुद्दा माना है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि कृषि उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही उन्होंने किसानों के साथ-साथ विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और सांसदों से उनकी एक-तिहाई भूमि पर जैविक खेती शुरू करने की अपील की।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक एवं पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए सिन्हा ने कहा, ''यह सही है कि बिहार के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कृषि कार्यों में प्रदूषित नालों के अपशिष्ट जल का उपयोग कर सब्जियां उगाई जा रही हैं। यह अत्यंत गंभीर और चिंता का विषय है। इस संबंध में मेरा विभाग 12 संबंधित विभागों को पत्र लिख चुका है ताकि समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।"
मंत्री ने कहा कि इस संबंध में क्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के अध्ययन समेत विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में पता चला है कि सीवेज के पानी से उगाई गई सब्जियों में सीसा (लेड) और कैडमियम जैसी भारी एवं विषैली धातुएं निर्धारित मानकों से कहीं अधिक मात्रा में पाई गई हैं।
कुमार सर्वजीत ने कहा कि सीयूएसबी के अध्ययन में यह भी पाया गया कि रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों, यहां तक कि प्रतिबंधित कीटनाशकों का भी सीमा से कहीं अधिक मात्रा में उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ''विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययनों के अनुसार ऐसे प्रदूषित कृषि उत्पादों का लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर, यकृत, गुर्दा तथा प्रजनन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिहार में इस संबंध में खाद्य सुरक्षा मानकों की पर्याप्त निगरानी, जांच और प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह व्यापक जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।''
राजद विधायक ने प्रदूषित नाले के पानी और प्रतिबंधित रसायनों के कृषि में उपयोग पर रोक लगाने, प्रभावी निगरानी तथा दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि राज्य में ऐसी कोई सब्जी नहीं बची है, जिसका उत्पादन बड़े पैमाने पर रसायनों के उपयोग के बिना हो रहा हो।
उन्होंने दावा किया कि कुछ किसान कद्दू में रसायन का इंजेक्शन लगाते हैं, जिससे वह एक ही रात में बड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ चिंताजनक है।
सिन्हा ने कहा कि सरकार इस समस्या से पूरी तरह अवगत है और जनस्वास्थ्य तथा सुरक्षित कृषि उत्पाद सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषित जल के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे तथा कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और अन्य सक्षम संस्थानों द्वारा मिट्टी और सब्जियों के नमूनों की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा, ''जहां प्रदूषण निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाएगा, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। किसानों को वैकल्पिक कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। यदि हमने इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया तो जिस पीढ़ी के लिए हम काम कर रहे हैं और अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं, वही पीढ़ी संकट में पड़ जाएगी।''
कृषि मंत्री ने कहा कि करीब 30 वर्ष पहले बिहार में कैंसर के मरीज बहुत कम हुआ करते थे और यदि किसी को यह बीमारी हो जाती थी तो वह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन जाता था।
उन्होंने कहा, ''धरती माता अपनी उर्वरता बचाने के लिए कराह रही है। यदि हम इसमें विफल रहे तो हमारे बच्चों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। हमें समझना होगा कि गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन का उपयोग भी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।''
सिन्हा ने किसानों से जैविक खाद्यान्न, सब्जियां और फल उगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो लोगों को खेती से होने वाली आय से अधिक धन बीमारियों के इलाज पर खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को भी यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) जैसे रासायनिक उर्वरकों पर भारी सब्सिडी देनी पड़ती है।
उन्होंने सदन को बताया कि राज्य के स्कूलों में 550 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है, ताकि किसानों के बच्चे अपने अभिभावकों को खेतों की मिट्टी की जांच कराने और रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रेरित कर सकें।
सिन्हा ने कहा, ''राज्य में कृषि उत्पादों की सुरक्षा की जांच के लिए भी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। हालांकि उर्वरकों, कीटनाशकों और अन्य हानिकारक पदार्थों के अंधाधुंध उपयोग पर केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री रोक नहीं लगा सकते। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया 'खेत बचाओ अभियान' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत मिट्टी की जांच, उपयुक्त उर्वरक एवं कीटनाशकों की पहचान तथा उनके संतुलित उपयोग पर भी बल दिया जाता है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी लोगों से इस चुनौती का मिलकर सामना करने और भावी पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा करने की अपील की।
भाषा कैलाश जोहेब
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