विपक्ष को संसद से सड़क की राजनीति की ओर बढ़ना होगा : योगेंद्र यादव
रंजन
- 22 Jul 2026, 11:32 PM
- Updated: 11:32 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने बुधवार को विपक्ष की राजनीति में बुनियादी बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि भारत का लोकतांत्रिक परिदृश्य इस हद तक बदल चुका है कि विपक्षी दल अब केवल संसद और चुनावों के भरोसे नहीं रह सकते। यादव ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए उन्हें सड़कों पर शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़े करने होंगे।
'व्हिदर ऑपोजिशन : फ्रॉम इलेक्टोरल पॉलिटिक्स टू पॉलिटिक्स ऑफ रेजिस्टेंस' विषय पर एमपी वीरेंद्र कुमार स्मृति व्याख्यान देते हुए यादव ने कहा कि विपक्ष को 'चुनावी राजनीति से प्रतिरोध की राजनीति' की ओर बढ़ना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आरएसपी सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने दिवंगत सांसद को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें दूरदर्शी नेता बताया, जिनका योगदान राजनीति, पत्रकारिता, साहित्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक विकास और लोक नीति जैसे अनेक क्षेत्रों में रहा।
यादव ने अपने व्याख्यान में कहा कि विपक्ष को आमूलचूल बदलाव की जरूरत है, क्योंकि लोकतंत्र में भी ऐसा ही बदलाव आया है। यादव के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), प्रस्तावित परिसीमन और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे कदम मिलकर चुनावी प्रतिस्पर्धा की संरचना को बदलने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इनसे यह तय होगा कि कौन मतदान करेगा, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं कैसे तय होंगी और चुनाव कब होंगे।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को चुनाव लड़ना जारी रखना चाहिए, लेकिन चुनावी राजनीति अब लोकतांत्रिक संघर्ष का मुख्य मंच नहीं रह सकती। उन्होंने कहा, "अब संघर्ष का केंद्र सड़क है। विपक्ष की राजनीति का केंद्र संसद से सड़क की ओर स्थानांतरित होना चाहिए। आज प्रतिरोध की राजनीति की जरूरत है।"
यादव ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां संसद से नहीं, बल्कि किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलन और भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ अभियानों जैसे जनआंदोलनों से आईं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रतिरोध केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें किसान संगठन, नागरिक समाज समूह, मानवाधिकार संगठन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े आंदोलन तथा अन्य जमीनी अभियान भी शामिल होने चाहिए।
शिक्षा में जवाबदेही और रोजगार को लेकर हाल में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में हुए जुटान को प्रतिरोध की उस राजनीति का उदाहरण बताया, जो उनके अनुसार भविष्य में विपक्ष की राजनीति की दिशा तय करेगी।
स्वयं को इस आंदोलन का समर्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि आयोजकों ने 10,000 से 15,000 लोगों के आने की उम्मीद की थी, लेकिन इससे कहीं अधिक लोग पहुंचे और उनमें से अधिकांश स्वयं प्रेरित होकर आए थे।
यादव ने कहा कि अब आंदोलन को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़कर सभी के लिए समान गुणवत्ता वाली शिक्षा और रोजगार के अधिकार के लिए अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन को दिल्ली से निकालकर देशभर के जिलों तक ले जाने का भी आह्वान किया।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि वीरेंद्र कुमार भारत के उन शुरुआती सार्वजनिक व्यक्तित्वों में थे, जिन्होंने वैश्विक जल संकट, आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बीज तथा कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते नियंत्रण को लेकर आगाह किया था।
उन्होंने कहा कि दिवंगत नेता ने इन मुद्दों पर जनजागरूकता फैलाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया और नदियों, जंगलों एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए कई अभियान चलाए।
भाषा अमित रंजन
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