वाम दलों ने वांगचुक को हटाए जाने और बल प्रयोग की निंदा की
माधव
- 18 Jul 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) वाम दलों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को दूर करने के बजाय लोकतांत्रिक विरोध को दबा रही है।
वाम दलों ने छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
इससे पहले, शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने चिकित्सकीय सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए 21 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया।
भाकपा-माले लिबरेशन ने कहा कि वांगचुक को विरोध स्थल से हटाए जाने के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, और उसकी छात्र शाखा आइसा के तीन सदस्य - नेहा, मनीष और आमीन - अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगे। पार्टी ने लोगों से 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने की अपील भी की।
माकपा के महासचिव एम.ए. बेबी और भाकपा महासचिव डी. राजा ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया। दोनों नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की।
भाकपा-माले लिबरेशन ने एक बयान में आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने ''डराने-धमकाने, बल प्रयोग करने और लोकतांत्रिक असहमति को दबाने'' का रास्ता चुना क्योंकि उसके पास ''भ्रष्टाचार, पेपर लीक और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से बर्बाद करने के खिलाफ बढ़ते गुस्से का कोई जवाब नहीं है''।
पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पुलिस ने वांगचुक को हटाने की कार्रवाई तब की जब प्रदर्शनकारी कम संख्या में मौजूद थे।
बेबी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मैं दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करता हूं। शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को बर्बाद कर रही व्यवस्था को खत्म करने के बजाय सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरत रही है।''
माकपा नेता कहा, ''यह मोदी सरकार के तानाशाहीपूर्ण रवैये को दर्शाता है। असहमति की आवाज को दबाना जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।''
डी. राजा ने भी पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, ''दिल्ली पुलिस का शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन पर हमला और जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को जबरदस्ती हटाना पूरी तरह निंदनीय है। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथ विरोध कर रहे लोगों के साथ दुर्व्यवहार एक ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जो बातचीत और जवाबदेही के बजाय बल प्रयोग को प्राथमिकता देती है।''
भाषा शफीक माधव
माधव
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