प्याज पर सरकारें गिर सकती हैं तो छात्रों के मामले पर क्यों नहीं: वांगचुक
संतोष
- 18 Jul 2026, 12:34 AM
- Updated: 12:34 AM
(तस्वीरों के साथ जारी)
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का उनके शरीर पर प्रतिकूल असर होने के बावजूद वह अपने संकल्प पर अडिग हैं।
वांगचुक ने साथ ही कहा कि अगर प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकारें गिर सकती हैं तो छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग से भी राजनीतिक बदलाव आ सकता है।
वांगचुक ने अपने अनशन के 20वें दिन के अंत में साझा किए गए एक वीडियो संदेश में लोगों से 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।
वांगचुक ने कहा, ''हां, मैं अभी जीवित हूं। मेरे शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा क्षीण हो गया है। पहले शरीर की चर्बी खत्म होती है, उसके बाद मांसपेशियां और फिर अंग प्रभावित होते हैं। अंत में मस्तिष्क। अभी वह समय नहीं आया है।''
उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों को आश्वस्त करते हुए कहा, ''20वां दिन समाप्त होने वाला है। मैं यह बता दूं कि मेरा दिमाग अब भी ठीक है।''
मौजूदा आंदोलन से जवाबदेही तय होने या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की संभावना संबंधी सवालों का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि लोग अक्सर जन आंदोलनों की ताकत को कम करके आंकते हैं।
उन्होंने कहा, ''मैं आपसे पूछता हूं-भारत के लोग अपने बच्चों के जीवन और उनकी शिक्षा से ज्यादा प्यार करते हैं या प्याज से?''
वांगचुक ने कहा कि प्याज की कीमतों में भारी वृद्धि को लेकर लोगों में फैले आक्रोश के कारण देश में पहले भी सरकारें गिर चुकी हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत में जन आंदोलन के कारण तीन बार सरकारें गिरीं। एक बार 1980 में केंद्र सरकार गिरी। वर्ष 1998 में दिल्ली सरकार गिरी और उसी साल राजस्थान सरकार भी गिरी। ये आंदोलन किस मुद्दे पर हुए थे? प्याज की कीमतों पर।''
वांगचुक ने कहा, ''यहां हम बच्चों के जीवन की बात कर रहे हैं। इस साल 20 से अधिक आत्महत्याएं हो चुकी हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या बढ़ सकती है। क्या हम इस आंदोलन के जरिये जवाबदेही तय नहीं करा सकते? क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे?''
उन्होंने लोगों से 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन की ताकत लोगों की भागीदारी में निहित है।
वांगचुक ने कहा, ''20 जुलाई को मेरे साथ संसद तक मार्च कीजिए। आप हमारी ताकत हैं। अन्यथा मैं कौन हूं? मैं क्या हूं? मैं अकेला, भूखा और बेकार इंसान हूं। आप ही ताकत हैं।''
उन्होंने कहा, ''आपकी संख्या हमारी ताकत है। इसी ताकत ने प्याज के मुद्दे पर सरकारें गिराई हैं। हम केवल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।''
कॉकरोच जनता पार्टी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रही है।
वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष
1807 0034 दिल्ली