तेजपाल पर आरोप लगाने वाली की 'झूठ बोलने की प्रवृत्ति' : बचाव पक्ष की उच्च न्यायालय में दलील
सुरेश
- 17 Jul 2026, 06:18 PM
- Updated: 06:18 PM
पणजी, 17 जुलाई (भाषा) तहलका पत्रिका के संस्थापक-संपादक और 2013 यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी तरुण तेजपाल ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय में दावा किया कि पीड़िता की ''झूठ बोलने की आदत'' थी और कथित घटना के बाद उसका व्यवहार गहरे सदमे में होने के उसके दावों के उलट था।
तेजपाल का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता आबाद पोंडा ने दलील दी कि हालांकि पीड़ित महिला का दावा था कि नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में हुई घटना से वह सदमे में थीं, लेकिन उसकी बातचीत और गवाहों के बयानों से यह साबित हुआ कि कथित यौन हमले के बाद के दिनों में वह आज़ादी से घूम-फिर रही थी और पार्टियों में भी शामिल हो रही थी।
पीड़ित महिला तेजपाल की सहयोगी रही है।
बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ में न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर राज्य सरकार की अपील पर आखिरी दलीलों की सुनवाई कर रहे हैं।
यह मामला तेजपाल की तत्कालीन महिला सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया था कि सात और आठ नवंबर, 2013 को गोवा में 'तहलका' पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उनका यौन उत्पीड़न किया।
गोवा के मापुसा की एक अदालत ने 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था और इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय का रुख किया है।
पोंडा ने उच्च न्यायालय में दलील दी, ''हम यह नहीं कह रहे हैं कि उनके बीच आपसी सहमति से संबंध थे। हम महिला के चरित्र पर कोई बहस नहीं कर रहे हैं। हम बस यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनमें झूठ बोलने की आदत है।''
शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि कथित हमले के बाद वह गोवा में ही रुक गई थी, क्योंकि वह सदमे थी। बचाव पक्ष ने उस बयान का उल्लेख करते हुए दलील दी कि घटना के बाद के दिनों में महिला का व्यवहार इस दावे का समर्थन नहीं करता।
पोंडा ने पीठ से कहा कि शिकायतकर्ता और उसके दोस्तों एवं परिचितों के बीच हुई बातचीत और गवाहों के बयानों से इंगित होता है कि आठ नवंबर से 15 नवंबर, 2013 के बीच वह पार्टियों में शामिल हुई, लोगों से मिली-जुली और आज़ादी से घूमती-फिरती रही।
बचाव पक्ष ने एक ऐसी घटना का भी ज़िक्र किया, जिसमें पीड़िता ने कथित तौर पर दोस्तों को चैट के ज़रिये बताया था कि वह काम कर रही थी, जबकि दूसरे गवाहों ने गवाही दी कि वह सुबह चार बजे तक एक पब में थी।
पोंडा ने अदालत में दावा किया कि पीड़िता द्वारा 'तहलका' की तत्कालीन प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को ईमेल भेजकर की गई शिकायत और प्राथमिकी में अंतर है। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती संस्करण में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दुष्कर्म के अपराध का ज़िक्र नहीं था।
पोंडा ने कहा कि शिकायतकर्ता के ईमेल में एक ''कोशिश'' का ज़िक्र था और उन्होंने दलील दी कि दुष्कर्म के आरोप पर अभियोजन पक्ष का मामला ''पूरी तरह झूठ'' था।
इस मामले की सुनवाई शनिवार को भी जारी रहेगी।
भाषा धीरज सुरेश
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