पुरी रथ यात्रा में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए, शुक्रवार को फिर रथ खींचने का अवसर मिलेगा
संतोष
- 16 Jul 2026, 11:47 PM
- Updated: 11:47 PM
(तस्वीरों के साथ)
पुरी, 16 जुलाई (भाषा) भगवान जगन्नाथ और उनके भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के भक्तों को शुक्रवार को रथ खींचने का एक और अवसर मिलेगा, क्योंकि 'पहंडी' रस्म में देरी के कारण तीनों में से कोई भी रथ श्री गुंडिचा मंदिर नहीं पहुंच सका। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
भगवान बलभद्र का 'तालध्वज' रथ अपने निर्धारित समय शाम चार बजे के बजाय शाम पांच बज कर 10 मिनट पर आगे बढ़ना शुरू हुआ, जो ग्रैंड रोड पर करीब 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद मार्केट छक पर रुक गया।
अधिकारियों ने बताया कि रथों को 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचने के लिए 2.6 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।
इसी प्रकार, देवी सुभद्रा का 'दर्पदलन' रथ करीब 400 मीटर की दूरी तय करने के बाद मरीचीकोट छक पर रुक गया, जबकि भगवान जगन्नाथ के 'नंदिघोष' रथ को केवल कुछ ही गज की दूरी तक खींचा जा सका और वह सिंहद्वार के पास ही खड़ा रहा।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक, रथ यात्रा में 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं ने भाग लिया, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, यह संख्या आठ से नौ लाख बताई है।
प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने पत्रकारो से कहा, "अनुष्ठानों में बिल्कुल भी देरी नहीं हुई, लेकिन 'पहंडी' प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके कारण 'पहंडी' में देरी हुई।"
उन्होंने बताया कि रथ खींचने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे फिर शुरू होगी और देवता रातभर रथों पर ही विराजमान रहेंगे।
पाढ़ी ने कहा कि तीनों देवता शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे, जबकि गुंडिचा मंदिर में प्रवेश का जुलूस शनिवार को आयोजित किया जाएगा।
पाढ़ी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की 'पहंडी' रस्म के दौरान पारंपरिक 'ताहिया' (फूलों का मुकुट) का उपयोग नहीं किया गया, क्योंकि बारिश के कारण वह भीगकर भारी हो गया था।
मंदिर के एक अधिकारी ने कहा कि गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव द्वारा पारंपरिक 'छेरा पहरा' (रथों की सफाई की रस्म) संपन्न करने और पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के दर्शन के बाद रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई।
पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का चक्र रूपी अस्त्र है। भगवान विष्णु की पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि 'बड़ा डंडा' से बारिश का पानी निकालने और रथ यात्रा को बिना किसी बाधा के संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को श्री जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक इसी मार्ग से खींचकर ले जाएंगे।
हर साल उड़िया महीने में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होने वाली रथ यात्रा ही वह एकमात्र अवसर होता है, जब भाई-बहन के रूप में पूजे जाने वाले देवी-देवताओं के विग्रहों को मंदिर के रत्नजड़ित सिंहासन- 'रत्न सिंहासन' से उतार कर बाहर लाया जाता है।
पुरी में भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और वे 'बड़ा डंडा' पर नृत्य करते तथा रथ यात्रा का जश्न मनाते नजर आए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पुरी में मंगलवार से अब तक 233 मिलीमीटर बारिश हुई है और समुद्र किनारे बसे इस तीर्थ नगर में बाद में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बारिश के कारण जल-जमाव की बड़ी चुनौती के बीच मुख्यमंत्री ने पुरी जिला प्रशासन, नगरपालिका अधिकारियों और संबंधित विभागों को पूरी तरह सतर्क रहने तथा पानी निकालने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई. बी. खुरानिया ने बताया कि पुरी में सुरक्षा के बहुस्तरीय इंतजाम किए गए हैं और उत्सव के लिए भारतीय पुलिस सेवा के 19 अधिकारियों तथा करीब 13,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 15 कंपनियों को महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन को निष्क्रिय करने वाली प्रणाली से जुड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कुल 473 सीसीटीवी कैमरों के जरिये दो कमान एवं नियंत्रण केंद्रों से 'बड़ा डंडा' और आसपास के इलाकों की निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस समुद्री थाने द्वारा संयुक्त गश्त की जा रही है तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि समुद्र तट पर आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और डूबने की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए 500 से अधिक 'लाइफगार्ड' तथा अग्निशमन सेवा के कर्मियों को तैनात किया गया है।
भाषा
प्रचेता संतोष
संतोष
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