भारत में ऐसे बच्चों की संख्या घटी, जिन्हें जन्म के पहले साल में एक भी टीका नहीं लगा : रिपोर्ट
अविनाश
- 15 Jul 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) भारत में ऐसे बच्चों की संख्या 2024 में अनुमानित 9.09 लाख से घटकर 2025 में लगभग 6.79 लाख रह गई, जिन्हें उनके जीवन के पहले साल के दौरान जीवनरक्षक टीकों की एक भी खुराक नहीं मिली। बुधवार को जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के ताजा आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई।
डब्ल्यूएचओ-यूनिसेफ के सालाना राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज अनुमान (डब्ल्यूयूईएनआईसी) से यह भी पता चलता है कि 2001 (जब पहली बार यह अनुमान जारी हुआ था) के बाद पहली बार भारत उन शीर्ष 10 देशों की सूची से बाहर हुआ है, जहां खसरे के टीके से वंचित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अब 95 फीसदी बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी से बचाने वाले डीटीपी टीके की तीनों खुराक, जबकि खसरे के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाली एमसीवी2 टीके की दोनों खुराक लग चुकी है।
डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने इस उपलब्धि का श्रेय शहरी झुग्गी-बस्तियों, प्रवासी आबादी, दुर्गम क्षेत्रों और टीकाकरण को लेकर झिझक रखने वाले समुदायों में ऐसे बच्चों तक पहुंचने के लिए चलाए गए लक्षित टीकाकरण अभियानों को दिया।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वैश्विक स्तर पर अनुमानित 1.35 करोड़ ऐसे बच्चे थे, जिन्हें उनके जीवन के पहले साल के दौरान जीवनरक्षक टीकों की एक भी खुराक हासिल नहीं हुई। इनमें से लगभग 6.79 लाख बच्चे भारत के हैं।
डब्ल्यूयूईएनआईसी के मुताबिक, 2025 में वैश्विक स्तर पर 90 फीसदी शिशुओं (लगभग 11.6 करोड़) को डीटीपी टीके की कम से कम एक खुराक मिली, जबकि 85 प्रतिशत (करीब 11 करोड़) को तीनों खुराक हासिल हुई।
इसमें कहा गया है कि दोनों संकेतकों में पिछले साल के मुकाबले एक-एक प्रतिशत अंक के सुधार के बावजूद वैश्विक टीकाकरण कवरेज अभी भी महामारी से पहले के स्तर से नीचे है और पिछले एक दशक से इसमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
डब्ल्यूयूईएनआईसी के अनुसार, 2025 में दुनिया में ऐसे बच्चों की संख्या में 2024 के मुकाबले लगभग 7.50 लाख की कमी दर्ज की गई, जिन्हें उनके जीवन के पहले साल के दौरान जीवनरक्षक टीकों की एक भी खुराक नहीं मिली।
हालांकि, इसमें कहा गया है कि टीकाकरण की शुरुआत करने वाले, लेकिन तय टीकाकरण कार्यक्रम को पूरा नहीं करने वाले बच्चों की बड़ी संख्या अब भी प्रगति में बाधा बनी हुई है।
डब्ल्यूयूईएनआईसी में कहा गया है कि दुनियाभर में अनुमानित 73 लाख शिशुओं को डीटीपी टीके की पहली खुराक मिली, लेकिन वे खसरे के टीके की पहली खुराक लेने से पहले ही टीकाकरण प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे खसरा टीकाकरण उस 95 प्रतिशत के स्तर से काफी नीचे बना हुआ है, जो बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए जरूरी माना जाता है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि हर बच्चा, चाहे उसका जन्म कहीं भी हुआ हो, टीकों से मिलने वाली सुरक्षा का हकदार है। उन्होंने टीकाकरण कार्यक्रमों में लगातार निवेश जारी रखने का आह्वान किया।
वहीं, यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा, "सरकारों और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों से कोविड-19 महामारी के दौरान आई बड़ी गिरावट के बाद वैश्विक टीकाकरण दरों में फिर से सुधार आया है।"
उन्होंने कहा, "लेकिन संघर्ष, विस्थापन और गरीबी के कारण अब भी लाखों संवेदनशील बच्चे सुरक्षा से वंचित हैं। हमें हर बच्चे तक पहुंचना होगा और जहां लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है, वहां उसे फिर से मजबूत करना होगा। किसी भी बच्चे को ऐसी बीमारी से पीड़ित नहीं होना चाहिए, जिसे साधारण टीके से रोका जा सकता है।"
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
1507 2114 दिल्ली