नेकां को अनुच्छेद-370 को बहाल करने की मांग करनी चाहिए : कांग्रेस नेता सोज
खारी
- 15 Jul 2026, 06:26 PM
- Updated: 06:26 PM
श्रीनगर, 15 जुलाई (भाषा) कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने बुधवार को कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर तक ही अपना विरोध सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि पूर्ववर्ती राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग करनी चाहिए।
सोज 1999 में नेकां के लोकसभा सदस्य थे और तब पार्टी अटल बिहारी वाजपेयी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा थी। सोज ने उस समय पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान दिया जिससे वाजपेयी की 13 महीने पुरानी सरकार गिर गई। नेकां ने उन्हें बाद में पार्टी से निकाल दिया, जिसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ''नेकां को जंतर-मंतर पर (सिर्फ) पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की बात नहीं करनी चाहिए। हमारा मुद्दा पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है।''
सोज, पूर्व मंत्री एवं नेकां नेता डॉ.शेख मुस्तफा कमाल को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पर गए थे। कमाल का मंगलवार को निधन हो गया था।
सोज ने कमाल के आवास से लौटने पर संवाददाताओं से कहा, ''राज्य का दर्जा कौन छीन सकता है? क्या कोई इसे हमेशा के लिए केंद्र-शासित प्रदेश बनाए रख सकता है? चाहे प्रधानमंत्री हों या गृह मंत्री, कोई भी जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्र-शासित प्रदेश नहीं बना सकता, यह एक अस्थायी व्यवस्था है।''
सोज से जब पूछा गया कि क्या नेकां ने उन्हें भी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, तो उन्होंने इसका जवाब 'न ' में दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का असली मुद्दा अंदरुनी स्वायत्तता है और उन्हें अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे कभी-कभी आपस में कहते हैं कि उन्हें कुछ नहीं दिया जाएगा, और यह युवाओं के संदर्भ में गलत बयान है।
उन्होंने कहा, ''हमारी युवा पीढ़ी को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि एक मुस्लिम-बहुल राज्य होने के बावजूद हमने भारत में विलय का फैसला किया, जहां हिंदू बहुमत में थे। उस समय शेख (मोहम्मद अब्दुल्ला) साहब ने इसे ही सही समझा, क्योंकि उस दौर में भारत में आठ करोड़ मुसलमान रहते थे।''
उन्होंने कहा, ''अभी 23-24 करोड़ मुसलमान हैं, इसलिए भारत में रहने का हमारा फैसला सही था। लेकिन, हमारी अंदरुनी स्वायत्तता हमारी अपनी शर्तों पर जरूर बहाल होनी चाहिए।''
भाषा धीरज खारी
खारी
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