ओडिशा : स्कूली पाठ्यपुस्तकों में भारी त्रुटियों के मामले में एससीईआरटी के पूर्व निदेशक गिरफ्तार
सुरेश
- 14 Jul 2026, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
भुवनेश्वर, 14 जुलाई (भाषा) ओडिशा में कक्षा एक से आठ तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बड़े पैमाने पर पाई गई त्रुटियों के मामले में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाधी को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
ओडिशा प्रशासनिक सेवा (ओएएस) के वरिष्ठ अधिकारी पाधी को इससे पहले विकास आयुक्त डी.के. सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर निलंबित किया गया था।
इस मामले में एससीईआरटी के तीन अन्य सहायक निदेशकों को भी निलंबित किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पाठ्यपुस्तकों में वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को 'पायलट' बताए जाने सहित अनेक त्रुटियों को लेकर व्यापक आलोचना के बाद उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था।
ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई व्यापक त्रुटियों के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए सोमवार को कई टीमें गठित की थीं।
शिक्षक शिक्षा एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक मधुस्मिता साहू द्वारा अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद सीआईडी-अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया था।
सीआईडी-सीबी ने एक बयान में कहा, ''मनोज कुमार पाधी (57) के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) (आपराधिक न्यासभंग), धारा 201 (लोक सेवक द्वारा जानबूझकर आधिकारिक दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख गलत तरीके से तैयार करना अथवा अनुवाद करना) तथा धारा 3(5) (सामूहिक आपराधिक दायित्व) के तहत मामला दर्ज किया गया है।''
बयान में कहा गया कि जांच के दौरान पाया गया कि एससीईआरटी के तत्कालीन निदेशक के रूप में पाधी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पाठ्यपुस्तकों के विकास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी, समन्वय, पर्यवेक्षण और अनुमोदन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
एक अधिकारी ने कहा, ''हालांकि उन्होंने अपने आधिकारिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया और तथ्यों, वैज्ञानिक जानकारी, भौगोलिक विवरण, अनुवाद तथा चित्रों का सत्यापन सुनिश्चित किए बिना ही प्रकाशन के लिए अंतिम पांडुलिपियों को मंजूरी देकर आगे भेज दिया, जो आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आता है।''
जांच में यह भी सामने आया है कि इन कृत्यों और चूकों के कारण त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन और वितरण हुआ, जिससे राज्य के खजाने को लगभग 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तथा जनहित भी प्रभावित हुआ।
इससे पहले, मंगलवार को अपराध शाखा के अधिकारियों ने पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों के मामले में अपनी जांच के तहत पाधी से पूछताछ की थी। यह मामला तब सामने आया जब शिक्षकों के एक वर्ग ने राज्य सरकार द्वारा वितरित पाठ्यपुस्तकों में 1,600 से अधिक त्रुटियां होने का दावा किया।
मुख्यमंत्री माझी ने इन त्रुटियों पर चिंता जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि इसके पीछे राज्य सरकार की छवि खराब करने की गहरी साजिश हो सकती है।
भाषा रवि कांत सुरेश
सुरेश
1407 1945 भुवनेश्वर