निर्वाचन आयोग विपक्ष के साथ 'बहुत पक्षपाती' व्यवहार कर रहा, विश्वसनीयता को 'गहरा धक्का' लगा: कुरैशी
वैभव
- 14 Jul 2026, 08:45 PM
- Updated: 08:45 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) एसवाई कुरैशी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मौजूदा निर्वाचन आयोग विपक्षी दलों के साथ "बहुत पक्षपाती" व्यवहार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आयोग की छवि और विश्वसनीयता को "गहरा धक्का" लगा है।
साल 2010 से 2012 के बीच देश के 17वें सीईसी के रूप में सेवाएं देने वाले कुरैशी ने कहा कि देश की सबसे भरोसेमंद संस्थाओं में शुमार निर्वाचन आयोग की साख धीरे-धीरे कमजोर हुई है और उन्हें इस बात का "बहुत दुख" है।
कुरैशी ने अपनी नयी किताब 'इंडिया एंड आई : अ हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले 'पीटीआई वीडियो' के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा कि उनकी नीतियों से विपक्षी दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा मिला था।
'हैशेट इंडिया' द्वारा प्रकाशित यह किताब कुरैशी के जीवन की 100 महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालती है।
कुरैशी को सीईसी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मतदाता शिक्षा प्रभाग, व्यय निगरानी प्रभाग और भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) की स्थापना जैसे कई अहम चुनाव सुधार लागू करने का श्रेय दिया जाता है।
मौजूदा निर्वाचन आयोग के विपक्ष के प्रति "पक्षपाती रवैया" अपनाने के उनके आरोपों और 24 विपक्षी दलों की ओर से प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजे गए पत्र के बारे में पूछे जाने पर कुरैशी ने कहा, "यह वास्तव में बहुत पीड़ादायक विषय है, क्योंकि जैसा कि मैंने (अपनी किताब में) लिखा है, विपक्ष के साथ खड़ा रहना मेरी घोषित नीति थी, क्योंकि वह कमजोर पक्ष होता है, वह सत्ता से बाहर होता है और उसे आपके समर्थन की जरूरत होती है।"
उन्होंने कहा, "सरकार की पहुंच बहुत लंबी होती है; वह अपने दम पर बहुत सारे काम करवा सकती है। ऐसे में विपक्ष ही वह पक्ष है, जिसे मदद और समर्थन की जरूरत होती है।"
पूर्व सीईसी ने कहा, "मैंने अपने सभी अधिकारियों से कहा था कि वे विपक्ष के लिए अपने सभी दरवाजे खुले रखें। अगर वे (विपक्षी दल) कल का समय मांगें, तो उन्हें आज ही का वक्त दे दें... अगर आपके पास एक अनुरोध सरकार की ओर से और दूसरा विपक्ष की ओर से आए, तो विपक्ष को प्राथमिकता दें, क्योंकि हमें पूरे देश, खासकर विपक्ष का भरोसा जीतना होता है।"
कुरैशी ने कहा कि सीईसी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान विपक्ष आयोग के साथ बहुत सहज था।
उन्होंने कहा, "और मैं आपको याद दिला दूं कि मेरे पूरे कार्यकाल के दौरान भाजपा ही मुख्य विपक्षी पार्टी थी। और अगर उनके कुछ नेता मेरी आलोचना करते हैं, तो वे बहुत ही संकीर्ण सोच वाले हैं। मेरी नीति से वास्तव में विपक्ष, खासकर भाजपा को लाभ हुआ था। यह बात याद रखना बहुत जरूरी है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा आयोग विपक्ष के प्रति "थोड़ा पक्षपाती" रहा है, कुरैशी ने कहा कि "थोड़ा पक्षपाती" कहना बहुत कम करके आंकना होगा, क्योंकि वह "बहुत पक्षपाती" रहा है।
उन्होंने कहा, "यही वजह है कि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने (विपक्षी दल) दो बार उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। 24 पार्टियां शीर्ष अदालत पहुंची हैं, क्योंकि निर्वाचन आयोग उनकी बात नहीं सुन रहा है... यह स्वीकार्य नहीं है। वे (निर्वाचन आयोग) ऐसा कैसे कर रहे हैं और उससे कैसे बच निकल रहे हैं? मुझे हैरानी होती है। निर्वाचन आयोग से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं की जाती।"
कुरैशी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को सभी को साथ लेकर चलना होता है।
मौजूदा निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू तथा विवेक जोशी शामिल हैं।
साक्षात्कार के 'रैपिड-फायर' चरण में जब कुरैशी से ज्ञानेश कुमार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "उनके बारे में बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।"
पूर्व सीईसी ने कहा, "हम देखते हैं कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सरकार से सवाल पूछने के बजाय विपक्ष से सवाल पूछ रहा है। वे (जवाहरलाल) नेहरू के समय की बातें कर रहे हैं। वे विपक्ष से सवाल पूछ रहे हैं; जबकि इसका उलटा होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछा जाता है।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है।
कुरैशी ने कहा, "हम देखते हैं कि विपक्ष (निर्वाचन आयोग से) मिलने के लिए बार-बार समय मांगता है, लेकिन उसे वक्त नहीं दिया जाता। और मैं कोई बेबुनियाद आरोप नहीं लगा रहा हूं; एक हफ्ते पहले ही 24 पार्टियों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है... उन्होंने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखा है। कुछ साल पहले भी वे इसी तरह की शिकायत लेकर शीर्ष अदालत पहुंचे थे।"
जब कुरैशी से उनकी इस टिप्पणी के बारे में पूछा गया कि निर्वाचन आयोग को न सिर्फ निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वह निष्पक्ष दिखे, तो उन्होंने कहा, "जैसा कि आपने कहा, सबसे पहले तो उन्हें (निर्वाचन आयोग) निष्पक्ष होना ही होगा। सवाल यह है कि क्या वे निष्पक्ष हैं? निष्पक्ष दिखना बाद की बात है। तो असल बात यह है कि मैं नहीं, बल्कि लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं। यह एक ऐसा विषय है, जिस पर निर्वाचन आयोग को आत्ममंथन करना चाहिए।"
कुरैशी ने कहा, "और हमें याद रखना चाहिए कि (निर्वाचन आयोग में) तीन सदस्य हैं और तीनों का स्वभाव अलग-अलग होगा। मुझे यकीन है कि निर्वाचन आयोग के साथ जो हो रहा है, उसके कामकाज और उसकी छवि को लेकर आंतरिक स्तर पर कुछ चर्चा जरूर हो रही होगी।"
सीईसी के रूप में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कुरैशी ने कहा कि उन्हें उन चार पहल पर सबसे ज्यादा गर्व है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं।
उन्होंने कहा, "पहली पहल के तहत मैंने मतदाताओं को जागरूक करने पर ध्यान दिया और इसके लिए एक अलग विभाग बनाया। नतीजा यह हुआ कि 2010 के बाद से हर चुनाव में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया और मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ता ही जा रहा है।"
कुरैशी ने कहा, "दूसरी पहल के तहत मैंने चुनाव में धनबल के इस्तेमाल पर नियंत्रण की दिशा में काम किया। इसके लिए मैंने व्यय निगरानी प्रभाव के नाम से एक नया विभाग बनाया।"
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत मेरी ओर से की गई तीसरी, जबकि भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) की स्थापना चौथी अहम पहल है।"
कुरैशी ने कहा कि ये चारों पहल न केवल बरकरार रहीं, बल्कि लगातार मजबूत भी हुईं।
उन्होंने कहा, "लेकिन निर्वाचन आयोग की सबसे बड़ी साख उसकी छवि और विश्वसनीयता थी। मुझे यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है-और मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी बात गलत साबित हो-कि इसे गहरा धक्का लगा है।"
कुरैशी ने कहा, "जिस तरह से लोग सवाल उठा रहे हैं, उससे मुझे तकलीफ होती है, मुझे ऐसा लगता है मानो कोई मुझे ही थप्पड़ मार रहा हो, क्योंकि यही वह संस्था है, जिसने देश में सबसे अधिक विश्वसनीयता हासिल की थी। इसलिए मुझे लगता है कि उस साख को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा है।"
भाषा पारुल वैभव
वैभव
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