'सतलुज' फिल्म के प्रदर्शन पर रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबाने का प्रयास : अकाल तख्त के जत्थेदार
पवनेश
- 07 Jul 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
अमृतसर, सात जुलाई (भाषा) सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को प्रदर्शन के बाद ओटीटी मंच से हटाए जाने की निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास बताया है।
गड़गज ने मंगलवार को दावा किया कि ऐसे समय में जब मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर व्यापक रूप से बल दिया जा रहा है, तब ''भारत में सिख अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों की सच्चाई को देश और दुनिया के लोगों तक पहुंचने से रोकना असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण कृत्य है।''
उन्होंने दावा किया कि 1990 के दशक में जब सिख युवकों को गैर-न्यायिक हत्याओं और पुलिस की कथित फर्जी मुठभेड़ों का शिकार बनाया जा रहा था, तब मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने मारे गए लोगों का रिकॉर्ड जुटाकर इन तथ्यों को दुनिया के सामने रखा।
गड़गज ने कहा कि खालड़ा की कहानी मानवाधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघनों में से एक को उजागर करती है और यह दिखाती है कि सच्चाई को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता, क्योंकि अंततः वह सामने आ ही जाती है।
उन्होंने कहा कि जब विभिन्न समुदायों, विशेषकर बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ अत्याचारों को दिखाने वाली फिल्मों का देश में स्वतंत्र रूप से प्रदर्शन हो सकता है, तब सिख अल्पसंख्यकों पर हुए कथित उत्पीड़न को दिखाने वाली फिल्म को रोकना पूरी तरह अनुचित है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि केंद्र सरकार को उदारता का परिचय देते हुए खालड़ा द्वारा उजागर किए गए तथ्यों को देश के लोगों तक पहुंचने देना चाहिए और 'सतलुज' फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''जितना कोई सच्चाई से भागने की कोशिश करता है, वह उतनी ही मजबूती से दुनिया के सामने आती है। लोगों को यह जानना चाहिए कि अपराध करने वाले हमेशा जवाबदेही से बच नहीं सकते।''
गड़गज ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह ''जून 1984 के बाद के दशक में सिखों की हत्याओं और सिख युवकों की कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों'' से जुड़े मामलों को गंभीरता और ईमानदारी से देखे।
उन्होंने कहा कि सरकार को सिख समुदाय को न्याय दिलाना चाहिए और उसके लंबे समय से चले आ रहे जख्मों को भरने में मदद करनी चाहिए।
गड़गज ने कहा कि दुनिया के सामने सिखों पर हुए कथित अत्याचारों को दिखाने वाली इस फिल्म को रोके जाने से सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
हनी त्रेहान की इस फिल्म में दोसांझ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है, जिन्हें 1995 में अगवा कर लिया गया था और उसके बाद वह कभी नहीं नजर आए।
इस फिल्म का मूल शीर्षक "पंजाब 95" था और यह तीन साल से अधिक समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही। निर्देशक और अभिनेता ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा सुझाए गए 127 कट के साथ इसे रिलीज करने से मना कर दिया था।
फिल्म को बिना किसी काट-छांट के एक ओटीटी मंच पर रिलीज किया गया, लेकिन रविवार शाम को उक्त ओटीटी मंच ने दर्शकों को बताया कि यह अब भारत में दर्शकों के लिए उपलब्ध नहीं है।
वर्ष 2023 में इस फिल्म का 'वर्ल्ड प्रीमियर' टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (टिफ्फ) में निर्धारित था, लेकिन आयोजकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किए बिना ही इसे महोत्सव के कार्यक्रम से हटा दिया गया।
''पंजाब 95'' को भारत को छोड़कर दुनियाभर में बिना किसी काट-छांट के 7 फरवरी 2025 को रिलीज किए जाने की योजना थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका था।
भाषा रवि कांत रवि कांत पवनेश
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