हर्ष फायरिंग में महिला की मौत: भाजपा विधायक राजू कुमार ने रिहाई की अपील की
नरेश
- 03 Jul 2026, 07:17 PM
- Updated: 07:17 PM
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) हर्ष फायरिंग में एक महिला की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत से परिवीक्षा पर रिहा किए जाने की अपील की।
उन्होंने दलील दी कि उनका मकसद किसी की जान लेना नहीं था और एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
ये दलीलें सजा की अवधि तय करने पर बहस के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के सामने रखी गईं। अदालत ने सजा पर अपना आदेश चार जुलाई तक सुरक्षित रख लिया।
बिहार के साहेबगंज से विधायक सिंह (56) को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो (गैर-इरादतन हत्या) और लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
सिंह की ओर से अदालत में पेश वकील नंदिता राव ने कहा कि उनके मुवक्किल छह बार विधायक रह चुके हैं, उन्हें पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया है और वह समाज के एक ज़िम्मेदार सदस्य हैं।
राव ने कहा, ''मेरे मुवक्किल का मकसद कभी किसी की जान लेना नहीं था। वह छह बार विधायक रहे हैं, अपने निर्वाचन क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं, समाज के एक उपयोगी सदस्य हैं और काफी पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं। उन्हें पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया है। इसलिए उनके प्रति नरमी बरती जा सकती है और उन्हें परिवीक्षा पर रिहा करने पर विचार किया जा सकता है।''
अधिवक्ता राजीव मोहन ने आगे कहा कि भले ही अदालत ने सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो के तहत दोषी ठहराया है, लेकिन अपराध की प्रकृति को देखते हुए सही सजा तय करते समय अदालत को 'जानकारी' वाले पहलू पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''मैं यह नहीं कह रहा कि लापरवाही नहीं थी। हालांकि, सजा सुनाने से पहले जल्दबाजी या लापरवाही के स्तर और अपराध की परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।''
विशेष लोक अभियोजक चिरंजीत सिंह ने परिवीक्षा पर रिहा किए जाने की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी राहत से समाज में गलत संदेश जाएगा, खासकर हर्ष फायरिंग से जुड़े मामलों में।
चिरंजीत ने कहा, ''पीड़िता 45 साल की थी। उसकी 12 साल की बेटी ने पूरी घटना देखी थी। परिवार जिस सदमे से गुजरा उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।''
उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े इलाके में फैले फार्महाउस के बावजूद, दोषी ने मंच के पास फायरिंग की जहां मेहमान एकत्र हुए थे।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सिंह की सजा को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के भाग-दो (गैर-इरादतन हत्या) और हथियार लाइसेंस संबंधी नियमों के उल्लंघन को लेकर शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया है।
सिंह (56) बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक हैं।
अदालत ने इससे पहले अपने 97 पृष्ठ के आदेश में कहा था, ''समारोहों के दौरान हर्ष फायरिंग की घटनाएं एक अभिशाप हैं जिनसे हमारे देश में अक्सर लोगों की जान चली जाती है।''
अदालत ने कहा था, ''यह मामला भी इसी तरह की एक घटना का उदाहरण है, जिसमें बिहार के कई बार विधायक रह चुके आरोपी राजू कुमार सिंह द्वारा 31 दिसंबर 2018 और एक जनवरी 2019 की दरमियानी रात को नव वर्ष की पार्टी में कथित तौर पर लापरवाही से की गई हर्ष 'फायरिंग' के कारण एक अतिथि की मौत हो गई। अन्य आरोपियों ने कथित रूप से घटना से जुड़े सबूत मिटाए।''
अदालत ने उसके समक्ष पेश सबूतों का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह साबित हो गया है कि कई गवाहों ने सिंह की पहचान की और उन्होंने ही वह गोली चलाई थी जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई।
भाषा
संतोष नरेश
नरेश
0307 1917 दिल्ली