हजारे की धमकी के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस का नये आरटीआई नियम को स्थगित करने का आदेश
नरेश
- 02 Jul 2026, 05:48 PM
- Updated: 05:48 PM
मुंबई, दो जुलाई (भाषा) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पारदर्शिता के पैरोकारों के विरोध और भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिमों में आगे रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र के विवादास्पद सूचना का अधिकार नियम को तत्काल स्थगित करने का आदेश दिया है।
महाराष्ट्र सूचना का अधिकार (आरटीआई) नियम, 2026 में आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान का सबूत अनिवार्य करने, हर आवेदन को एक ही विषय तक केंद्रित करने जैसे कई बदलाव प्रस्तावित थे।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आरटीआई के मुख्य आयुक्त से नए अधिसूचित नियम को स्थगित कर देने को कहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सरकार से 'महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026' को वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये नियम आरटीआई कानून की मूल भावना को कमज़ोर करते हैं तथा नागरिकों के लिए जानकारी हासिल करना और मुश्किल बना देते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर आरटीआई नियमों में किये गये बदलाव वापस नहीं लिए गए तो वह पांच जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री को भेजे गए एक ज्ञापन में हज़ारे ने दावा किया कि नए नियम से अपील की प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक बाधाएं आयेंगी, ज़्यादा लागत और जटिलताएं पैदा होंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमज़ोर होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी और 12 जून को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, नए नियम प्रकाशन के साथ ही तुरंत लागू हो गए थे।
नए नियमों के तहत, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदकों को 30 रुपये का आवेदन शुल्क देना होता।
जानकारी के लिए शुल्क 'ए-फोर साइज' पृष्ठ के लिए पांच रुपये प्रति पेज और स्कैन किए गए या डिजिटल पेज के लिए पांच रुपये तय किया गया है, जबकि रिकॉर्ड देखने की सुविधा पहले घंटे के लिए मुफ्त होगी और उसके बाद प्रति घंटे 50 रुपये का शुल्क लगेगा। गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को आवेदन शुल्क से छूट मिलेगी। हालांकि 50 पृष्ठ से ज़्यादा जानकारी के लिए शुल्क देना होगा।
नियमों में यह भी कहा गया है कि आरटीआई आवेदन आम तौर पर एक ही विषय तक सीमित होना चाहिए और सामान्य रूप से 150 शब्दों से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। अगर इसमें कई विषय शामिल हैं, तो जन सूचना अधिकारी सिर्फ़ पहले विषय पर कार्रवाई कर सकता है और आवेदक को बाकी मुद्दों के लिए अलग-अलग आवेदन देने की सलाह दे सकता है।
एक और अहम बदलाव यह है कि आवेदकों को आरटीआई आवेदन के साथ भारतीय नागरिकता साबित करने वाले फोटो पहचान पत्र की खुद से प्रमाणित प्रति जमा करनी होगी। ऐसे सबूत के बिना दिये गये आवेदनों को जरूरी जानकारी पूरी करने के लिए वापस भेजा जा सकता है।
नियमों के अनुसार, अगर मांगी गई जानकारी सरकार या संबंधित सरकारी संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से मौजूद है, तो जन सूचना अधिकारी आवेदक को उसकी कॉपी देने के बजाय उसे ऑनलाइन देखने के लिए कह सकता है। नियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आम तौर पर सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से जुड़ी न होने वाली निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जाएगा, जब तक कि कोई बड़ा जनहित साबित न हो जाए।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के सामने पहली अपील के लिए 50 रुपये और महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग के सामने दूसरी अपील करने के लिए 100 रुपये की फीस देनी होगी तथा साथ में जरूरी दस्तावेज़ भी जमा कराने होंगे। सुनवाई आमने-सामने या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हो सकती है।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश
0207 1748 मुंबई