जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर कर रहे भूख हड़ताल
नेत्रपाल
- 29 Jun 2026, 12:51 AM
- Updated: 12:51 AM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल बैठ गए। उन्होंने परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि उनका संगठन चुनावी व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा भी उठाएगा।
दीपके ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद और अन्य परीक्षा संबंधी विवादों के बीच 20 जून को शुरू हुआ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस मंच से चुनावी प्रणाली से जुड़े मामलों समेत जवाबदेही से संबंधित अन्य मुद्दों को भी उठाया जाएगा।
दीपके ने कहा कि लोगों को इस विरोध को केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा, ''लोग यह मान रहे हैं कि यह सिर्फ नीट और शिक्षा का मुद्दा है... मैं आपको बता दूं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। हम चुनाव से जुड़े (मुद्दों) पर भी आएंगे।''
उन्होंने चुनावी मुद्दों, जिनमें मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शामिल है, का भी उल्लेख किया और कहा कि इस आंदोलन के जरिये अन्य चिंताओं को भी उठाया जाएगा।
दीपके ने कहा, ''चाहे हम चुनाव लड़ें या न लड़ें, हम चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए काम करेंगे। अभी जो हो रहा है — वोट हटाना — उससे ईवीएम की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।''
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के फैसले का कारण बताते हुए वांगचुक ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से शिक्षा उनके दिल के बेहद करीब रही है और जब युवा शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हों, तब वह चुप नहीं रह सकते।
वांगचुक (59) ने कहा, ''शिक्षा और पर्यावरण मेरे मुद्दे हैं, सच्चाई और शांति मेरा रास्ता है। न्याय मेरी मंज़िल है।''
कार्यकर्ता ने कहा कि वह पिछले पांच-छह वर्षों से लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण के आंदोलन से जुड़े रहे हैं।
वांगचुक के अनशन शुरू करने पर जंतर-मंतर पर ज्यादातर युवाओं और छात्रों समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। प्रदर्शन स्थल पर कई किसान नेता भी मौजूद थे।
वांगचुक ने कहा, ''मुझे मजबूरी में यहां बैठना पड़ा है, मैं यह सब खुशी-खुशी नहीं कर रहा हूं। मैं इन दोनों मुद्दों के समर्थन में अनशन पर बैठा हूं। बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं कि आप लद्दाख में आंदोलन कर रहे थे, तो अब आप सीजेपी के साथ क्यों हैं? यहां जो मुद्दा शिक्षा का है, वह पिछले 40 वर्षों से मेरे दिल के बेहद करीब रहा है, जब से मैं एक छात्र था।''
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ''बच्चों का जीवन संवारना और राष्ट्र को सही दिशा देना होना चाहिए। सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई होती, तो हमें यह सब नहीं झेलना पड़ता और न ही इतनी भीषण गर्मी में यहां बैठना पड़ता।''
वांगचुक ने कहा कि जब जवाबदेही का अभाव हो, तो लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन ही एकमात्र विकल्प बचता है।
उन्होंने कहा, ''जब जवाबदेही नहीं होती, तो लोकतंत्र में हमारे पास केवल एक ही रास्ता बचता है-शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन। इसलिए हम वही करेंगे।''
दीपके ने प्रदर्शनकारियों को आंदोलन को व्यक्ति केंद्रित नहीं बनाने की अपील करते हुए कहा, ''हम अपने देश में किसी एक व्यक्ति को मुद्दे से बड़ा क्यों बना देते हैं? हमने एक व्यक्ति को सभी मुद्दों, संस्थाओं और यहां तक कि आस्था से भी बड़ा बना दिया है। यह आपकी जिम्मेदारी है। किसी को भी मुद्दे से बड़ा कभी मत बनने दीजिए।''
दीपके ने पहले भी किसानों, छात्रों और संगठनों से प्रदर्शन में शामिल होने और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की मांग का समर्थन करने की अपील की है।
रविवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई किसान नेताओं को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए नजरबंद किया जा रहा है।
यह प्रदर्शन अन्य छात्र और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी शिकायतों का मंच भी बन गया, जिसमें जयपुर के एक स्कूल में आत्महत्या के कथित मामले में पिछले साल चौथी मंजिल से गिरकर जान गंवाने वाली कक्षा छह की छात्रा के परिवार ने भी अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग को लेकर आंदोलन में हिस्सा लिया।
छात्रा के माता-पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल या शिक्षक के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और पुलिस ने अभी तक आरोपपत्र भी दाखिल नहीं किया है।
विरोध-प्रदर्शन के दौरान दीपके ने आरोप लगाया था कि यह मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसे को लेकर व्यापक चिंताओं को दर्शाता है।
सर्व खाप पंचायत के प्रतिनिधियों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। खाप प्रतिनिधियों ने दीपके को पगड़ी पहनाई।
खाप प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि लगभग 500 किसान नेताओं और संगठनों के सदस्यों को दिल्ली आने से रोक दिया गया। दीपके ने इससे पहले भी इसी तरह का आरोप लगाया था।
ओडिशा के किसान नेता अक्षय कुमार ने कहा कि अगर मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, ''अगर प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह अगले चुनाव में हार जाएंगे।''
प्रधान ओडिशा के संबलपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सदस्य हैं।
किसान नेता अत्तर सिंह कादियान ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि वह सरकार चलाने में सक्षम नहीं है और उसे सत्ता से हट जाना चाहिए।
सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 20 जून को जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
भाषा
राजकुमार नेत्रपाल
नेत्रपाल
2906 0051 दिल्ली