तृणमूल कांग्रेस के 19 लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र आया सामने
माधव
- 12 Jun 2026, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
कोलकाता, 12 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के 19 बागी लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर वाला एक कथित पत्र सामने आया है, जो लोकसभा अध्यक्ष को लिखा गया है। इस पत्र में काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग गुट को मान्यता देने का अनुरोध किया गया है और भाजपा नीत राजग को समर्थन देने की बात कही गई है।
हस्ताक्षरित पत्र सामने आने से उन सांसदों के बारे में तस्वीर साफ होती प्रतीत हो रही है जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं।
'पीटीआई-भाषा' स्वतंत्र रूप से हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता या लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे गए कथित संदेश की पुष्टि नहीं कर सकी है।
राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में प्रसारित पत्र की प्रतियों के अनुसार, हस्ताक्षरकर्ताओं में बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार, बीरभूम की सांसद शताब्दी रॉय, मथुरापुर के सांसद बापी हलदर, बर्धमान पुरबा की सांसद शर्मिला सरकार, कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र वर्मा बसुनिया और बोलपुर के सांसद असित मल शामिल हैं।
एक बागी सांसद ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''जो सूची वायरल हुई है, वह असली है। कुछ और लोग भी हमारे साथ जुड़ सकते हैं।''
बागी गुट के करीबी सूत्रों का दावा है कि सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग संसदीय गुट बनाने की जानकारी दी और अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखते हुए राजग का समर्थन करने के फैसले से उन्हें अवगत कराया।
लोकसभा में टीएमसी के 28 सदस्य हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद तृणमूल तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है।
बागी गुट का दावा है कि उनके पास 19 सांसदों का समर्थन है। यह संख्या दल-बदल रोधी कानूनों के तहत तय दो-तिहाई बहुमत की सीमा से ज्यादा है। अगर इन आंकड़ों को मान लिया जाता है, तो बागियों को कानूनी सुरक्षा मिल सकती है।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुए जबरदस्त विद्रोह के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जहां टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार के बजाय निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने का समर्थन किया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधायक दल के भीतर शुरू हुई बगावत अब पार्टी के लगभग हर स्तर पर फैल गई है।
इस मामले पर टीएमसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बागी नेताओं के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि संविधान के 91वें संशोधन में पार्टी टूटने से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं और जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्हें किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय करना होगा।
मोइत्रा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''टीएमसी के 'गद्दार' सांसदों को कानून की जानकारी नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन (2003) में अलग गुट बनाने का प्रावधान खत्म कर दिया गया था। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक पार्टी के दो तिहाई सदस्यों को किसी दूसरी पार्टी में विलय करना होता है। सभी 19 'गद्दारों' को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना होगा।''
वायरल हुए पत्र को लेकर टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने मांग की कि इन हस्ताक्षरों का मिलान लोकसभा सचिवालय के पास मौजूद नमूना हस्ताक्षरों से किया जाए।
उन्होंने कहा, ''जो हस्ताक्षर पत्र में नजर आ रहे हैं, उनकी पुष्टि संसद में जमा किए गए नमूना हस्ताक्षरों से की जानी चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि क्या वे मेल खाते हैं।''
भाषा
शफीक माधव
माधव
माधव
1206 2008 कोलकाता