धर्मस्थल मामला: साजिश से जुड़े आरोपी के दावे पर उच्च न्यायालय को जवाब देगी एसआईटी
माधव
- 12 Jun 2026, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
बेंगलुरु, 12 जून (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिला स्थित धर्मस्थल शहर में ''कई हत्याओं, दुष्कर्म और शवों को दफनाये जाने'' के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी, मुख्य आरोपी सी.एन. चिन्नैया की रिट याचिका पर उच्च न्यायालय को जवाब देगी।
याचिका में दावा किया गया है कि इस पवित्र स्थल को बदनाम करने के मकसद से एक साजिश रची गई थी।
मंत्री ने कहा कि याचिका में आरोपियों द्वारा किये गए दावों की सत्यता की पुष्टि आवश्यक है।
प्रियंक ने यहां पत्रकारों से कहा, ''यह अदालत की निगरानी में चल रही जांच है। अदालत ने एसआईटी (विशेष जांच दल) से कुछ सवाल पूछे हैं, जिनका जवाब एसआईटी प्रमुख देंगे -- इस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं की जा सकती। अदालत को जवाब दिये जाने के बाद ही इसकी जानकारी मिलेगी।''
इस सवाल पर कि चिन्नैया ने अपनी याचिका में कथित तौर पर यह दावा किया है कि साजिश को अंजाम देने के लिए विभिन्न स्रोतों से पैसा आया था, उन्होंने कहा, ''मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि अदालत में एक लिखित दलील दी गई है -- 200 करोड़ रुपये (के वित्तपोषण) का आरोप लगाया जा रहा है, जो कोई छोटी रकम नहीं है। इसमें से कितना सच है, यह पता नहीं है।''
गृह मंत्री ने कहा, ''यह वही व्यक्ति है जिसने कई हत्याओं, दुष्कर्म और शवों को दफना दिये जाने का दावा किया था। इस बात की पुष्टि की जानी चाहिए कि वह सच कह रहा है या नहीं।''
बृहस्पतिवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई, जिसमें चिन्नैया ने दावा किया कि धर्मस्थल को बदनाम करने की एक बड़ी साजिश के तहत उसका इस्तेमाल किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, उसने एसआईटी से अपनी जांच पूरी करने और कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया।
उसने कार्यकर्ता महेश शेट्टी तिमारोडी, गिरीश मट्टन्नवर, विट्ठल गौड़ा और जयंत समेत कई लोगों का कथित तौर पर नाम लिया और उन पर धर्मस्थल के खिलाफ ''एक मुहिम चलाने'' का आरोप लगाया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने राज्य सरकार और एसआईटी को नोटिस जारी कर 29 जून तक जांच की वस्तु स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
खबरों के मुताबिक, चिन्नैया ने याचिका में अभिनेता प्रकाश राज का भी कथित तौर पर जिक्र किया है और उनके साथ कथित तौर पर फोन पर बातचीत का भी हवाला दिया है।
अभिनेता से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए प्रियंक ने कहा, ''सिर्फ नाम आने से ही किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता। अदालत ने एसआईटी प्रमुख से जवाब मांगा है - उन्हें जवाब देने दें। उससे पहले, इन मामलों पर मीडिया में चर्चा नहीं की जा सकती।''
प्रकाश राज ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह जल्द ही मीडिया के समक्ष सभी संदेह दूर करेंगे और लोगों से अपील की कि वे अफवाहों या बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई और मनगढ़ंत बातों पर विश्वास न करें।
उन्होंने कहा, ''मेरी जानकारी में आया है कि धर्मस्थल मामले को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर मेरे बारे में कुछ खबरें और चर्चा चल रही है। चूंकि यह एक बेहद संवेदनशील मामला है जिसने लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है, इसलिए इन संदेहों और सवालों का जवाब देना मेरा कर्तव्य है।''
इन घटनाक्रमों के बीच, वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक सुनील कुमार ने मांग की कि सरकार तुरंत एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
शुक्रवार को यहां प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एसआईटी के गठन को कई महीने बीत जाने के बाद भी उसकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह बताए कि इस मामले के पीछे कौन था।
पिछले साल धर्मस्थल को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया था। एक शिकायतकर्ता -- जिसकी पहचान बाद में सी.एन. चिन्नैया के तौर पर हुई और जिसे झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया -- ने दावा किया था कि दो दशक में शहर में कई शव दफनाए गए हैं। इन शवों में उन महिलाओं के शव भी शामिल थे, जिनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ था। ये आरोप स्थानीय मंदिर के प्रशासकों की ओर इशारा करते हैं।
आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने धर्मस्थल में नेत्रावती नदी के किनारे वन क्षेत्र में चिन्नैया द्वारा बताई गई कई जगहों पर खुदाई की, जहां दो जगहों पर कंकाल मिले।
भाषा सुभाष माधव
माधव
1206 2021 बेंगलुरु