सरकारी धन के गबन से जुड़े अलग-अलग मामलों में सीबीआई ने दो आरोपपत्र दाखिल किए
मनीषा
- 12 Jun 2026, 04:48 PM
- Updated: 04:48 PM
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) की निधियों की कथित हेराफेरी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में शुक्रवार को आरोपपत्र दाखिल किए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि कुल मिलाकर 657 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी की गई।
यह मामला एक जटिल साजिश से जुड़ा है, जिसमें सरकारी धन को कथित फर्जी लेन-देन के जरिये मुखौटा कंपनियों से जुड़े खातों में भेजा गया।
सीबीआई के एक प्रवक्ता के अनुसार, अवैध लेन-देन के कारण हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में कुल 504 करोड़ रुपये और सीएससीएल मामले में 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में सीबीआई ने पंचकूला की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़ा यह मामला राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआई को सौंपा गया था।
इस मामले में दो व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है जो अवैध रूप से हासिल धन के लाभार्थी थे।
प्रवक्ता ने कहा, ''हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में यह दूसरा आरोपपत्र है। सीबीआई इससे पहले 15 आरोपियों और कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इन आरोपियों में तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंककर्मी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं।''
सीएससीएल मामले में चंडीगढ़ की विशेष अदालत में सात लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। यह इस मामले में पहला आरोपपत्र है।
सीबीआई ने सीएससीएल तथा चंडीगढ़ अक्षय ऊर्जा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन सोसाइटी (सीआरईएसटी) से जुड़े दो मामले चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध थाने से अपने हाथ में लिए थे।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, ''आरोपपत्रों में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों का उल्लेख किया गया है।''
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी इस मामले में और आरोपपत्र दाखिल करेगी।
सूत्रों ने कहा कि जांच से पता चला है कि ''भारी'' धनराशि विभिन्न मुखौटा कंपनियों एवं छोटी आभूषण इकाइयों को भेजी गई और फिर सोना खरीदने तथा रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के नाम पर इसकी हेराफेरी की गई।
उन्होंने कहा कि धन के इस लेन-देन के क्रम में ''बड़ी'' मात्रा में नकद निकासी की बात भी सामने आई है।
चंडीगढ़ के एक होटल कारोबारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला में रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण से जुड़ा है। 'एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक' की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज की 100 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया है, जो 583 करोड़ रुपये है।
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सिम्मी मनीषा
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