अधूरा ज्ञान खतरनाक, एनएफएचएस-6 स्वास्थ्य सेवा में बदलावों को दर्शाता है : नड्डा का खरगे पर पलटवार
पवनेश
- 06 Jun 2026, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 के निष्कर्षों की आलोचना पर पलटवार करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शनिवार को कहा कि "अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है"। उन्होंने कहा कि नवीनतम आंकड़े मोदी सरकार के तहत भारत के स्वास्थ्य सेवा संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाते हैं।
ये टिप्पणियां तब आईं जब खरगे ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया था कि एनएफएचएस-6 के आंकड़ों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की "पूर्ण अक्षमता" को उजागर किया है और उस पर स्वास्थ्य सेवा और पोषण में उसकी विफलताओं को उजागर करने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों को जानबूझकर छिपाने का आरोप लगाया था।
कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए, नड्डा ने उन पर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सर्वेक्षण के निष्कर्षों को चुनिंदा रूप से पढ़ने का आरोप लगाया और कहा कि आंकड़े प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के स्वास्थ्य तंत्र में हुए "उल्लेखनीय परिवर्तन" को दर्शाते हैं।
नड्डा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "श्री खरगे जी का अधूरा ज्ञान खतरनाक है। जन स्वास्थ्य इतना महत्वपूर्ण है कि इसे राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं किया जा सकता। चयनात्मक पठन राजनीति के काम आ सकता है, लेकिन राष्ट्र की सेवा तथ्य ही करते हैं।"
एनएफएचएस-3 (2005-06) के बाद से मातृ स्वास्थ्य देखभाल संकेतकों में सुधार का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में प्रसवपूर्व पंजीकरण 43.9 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गया, संस्थागत प्रसव 38.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए और कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसव 46.6 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गए।
मंत्री ने कहा कि ये उपलब्धियां देश भर में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा, "ये महज आंकड़े नहीं हैं। ये लाखों माताओं को समय पर देखभाल, सुरक्षित प्रसव और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम मिलने का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा की असली कहानी प्रगति की है, निराशा की नहीं।"
एक अन्य पोस्ट में, नड्डा ने नवीनतम सर्वेक्षण के निष्कर्षों की तुलना कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के दौरान दर्ज किए गए निष्कर्षों से की और कहा कि एनएफएचएस-6 में परिलक्षित लाभ मातृ स्वास्थ्य देखभाल से कहीं अधिक व्यापक हैं और उस दौरान देखे गए खराब परिणामों के बिल्कुल विपरीत हैं।
उन्होंने कहा, "संप्रग शासनकाल के दौरान आयोजित एनएफएचएस-3 (2005-06) की तुलना में: एनएफएचएस-6 में पूर्ण टीकाकरण दायरा बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है। स्वास्थ्य बीमा दायरा 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है। स्वच्छ मासिक धर्म सुरक्षा उत्पादों का उपयोग बढ़कर 79.2 प्रतिशत हो गया है। बच्चों में बौनापन 48.0 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गया है।"
उन्होंने इन सुधारों का श्रेय पिछले 10 वर्षों में स्वास्थ्य सेवा, पोषण, स्वच्छता और अंतिम छोर तक सेवा वितरण में किए गए निरंतर निवेश को दिया।
नड्डा ने कहा, "ये सुधार वर्षों की उपेक्षा और एक दशक के केंद्रित शासन के बीच के अंतर को उजागर करते हैं।"
उन्होंने कहा, "हर प्रतिशत अंक के पीछे लाखों भारतीय हैं जिन्हें बेहतर स्वास्थ्य, अधिक सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हुआ है। एनएफएचएस-6 केवल आंकड़ों का एक समूह नहीं है - यह निरंतर नीतिगत कार्रवाई और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से प्राप्त परिवर्तनकारी परिणामों का प्रमाण है।"
एक तीसरे पोस्ट में, स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस पर पिछली सरकारों की कमियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि नवीनतम सर्वेक्षण स्वास्थ्य सेवा तक बेहतर पहुंच और व्यापक सामाजिक सुरक्षा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस नेतृत्व किस बात को स्वीकार नहीं करना चाहता। दशकों से, बार-बार किए गए वादों के बावजूद, भारत खराब स्वास्थ्य परिणामों, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा पहुंच और कमजोर वितरण प्रणालियों से जूझ रहा है। उस दीर्घकालिक नीतिगत विफलता के परिणाम पीढ़ियों तक दिखाई देते रहे।"
भाषा प्रशांत पवनेश
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