ईडी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए भारी नकद निकासी की कर रही है जांच
माधव
- 24 Apr 2026, 09:12 PM
- Updated: 09:12 PM
नयी दिल्ली,24 अप्रैल (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि वह एक वैश्विक ईसाई मिशन द्वारा भारत के कुछ नक्सल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में करोड़ों रुपये निकालने के लिए विदेशी डेबिट कार्ड के इस्तेमाल की जांच कर रहा है।
एक सरकारी बयान के अनुसार ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत दर्ज मामले में 18-19 अप्रैल को कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाया।
बयान के मुताबिक छापेमारी के दौरान 25 विदेशी डेबिट कार्ड, 40 लाख रुपये नकद और कुछ 'अभियोजनयोग्य' डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए।
बयान में कहा गया है, ''यह जांच भारत में टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई) नामक आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों और आंदोलन से संबंधित व्यक्तियों से जुड़ी है।''
बयान के मुताबिक अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े डेबिट कार्ड भारत में लाए गए और देश भर के एटीएम से बार-बार नकदी निकालने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।
ईडी ने कहा कि इसके अलावा उसने पाया कि पिछले कुछ वर्षों में इन कार्डों का उपयोग करके छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले और बस्तर क्षेत्र समेत वाम चरमपंथ (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की 'असामान्य' और '"संदिग्ध' नकद निकासी की गयी।
ईडी के अनुसार, निकाली गई नकदी का इस्तेमाल बाद में भारत में टीटीआई के खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया, जो एफसीआरए के तहत पंजीकृत संगठन नहीं है।
टीटीआई के वेब पोर्टल पर जाने पर 'देश अवरुद्ध। इस पृष्ठ तक पहुंच प्रतिबंधित है' संदेश दिखाई देता है।
निदेशालय ने बताया कि आव्रजन ब्यूरो के अधिकारियों ने ईडी द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर हाल में बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर मीका मार्क नामक व्यक्ति को रोका तथा उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले।
ईडी को संदेह है कि इन कार्डों का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से बड़ी मात्रा में नकदी निकालने के लिए किया गया था, जो संगठित नेटवर्क की संभावित संलिप्तता का संकेत देता है।
निदेशालय ने कहा, ''नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की समानांतर नकदी-आधारित अर्थव्यवस्था का उदय भारत की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है । यह गैरकानूनी गतिविधियों के लिए अवैध धन के आवागमन को सुविधाजनक बना सकता है।''
एजेंसी को एक 'ऑनलाइन बिलिंग' और 'अकाउंटिंग' मंच का भी भी पता चला जिसका इस्तेमाल इन नकद निकासी का रिकॉर्ड रखने के लिए किया जाता था।
ईडी ने बताया कि उक्त मंच कथित तौर पर भारत के बाहर से संचालित संस्थाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है और नवंबर 2025 एवं अप्रैल 2026 के बीच लगभग 95 करोड़ रुपये भारत में भेजे गए थे।
भाषा
राजकुमार माधव
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