खेलों को बढ़ावा देने दंतेवाड़ा पहुंचे तेंदुलकर
आनन्द
- 22 Apr 2026, 07:41 PM
- Updated: 07:41 PM
दंतेवाड़ा, 22 अप्रैल (भाषा) पूर्व महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बुधवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए जो जमीनी स्तर की खेल पहल का हिस्सा है और इसका मकसद कभी माओवाद से प्रभावित रहे इस इलाके को एक फलता-फूलता खेल केंद्र बनाना है और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना है।
इस अवसर पर तेंदुलकर ने इस बात पर जोर दिया कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास जरूरी है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने का कोई 'शॉर्टकट' नहीं होता। उन्होंने बच्चों को यह भी सलाह दी कि वे सोच-समझकर दोस्त चुनें और अच्छे इंसान बनने की कोशिश करें।
वे छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में स्थित स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम हाई स्कूल में एक बहु खेल मैदान का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। इस मैदान को जमीनी स्तर की खेल पहल के तहत विकसित किया गया है जिसका मकसद कभी माओवाद से प्रभावित रहे इस इलाके को एक खेल केंद्र के रूप में बदलना है।
यह जिला प्रशासन की 'मैदान कप' पहल के तहत विकसित किए गए 25 मैदानों में से एक है। इस पहल को सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन और मान देसी फाउंडेशन का समर्थन प्राप्त है और इसका उद्देश्य इस क्षेत्र की संघर्ष-ग्रस्त छवि को मिटाना तथा खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है। पिछले साल शुरू की गई इस पहल का लक्ष्य पूरे जिले में 50 खेल के मैदान बनाना है।
तेंदुलकर जगदलपुर हवाई अड्डे पर पहुंचे और बाद में दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव गए। उनके साथ उनकी बेटी सारा और बहू सानिया चंडोक भी मौजूद थीं।
इस महान बल्लेबाज ने बच्चों से कहा कि प्रतिभा भले ही ईश्वर का तोहफा हो लेकिन सफलता व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करती है।
उन्होंने बच्चों को अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, ''अपने लक्ष्य तक पहुंचने का कोई शॉर्टकट नहीं है। कड़ी मेहनत, अनुशासन और एकाग्रता बेहद जरूरी हैं।''
बुनियादी ढांचे के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य के चैंपियनों को तैयार करने के लिए मजबूत बुनियादी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कई खेलों में हिस्सा लेने पर भी जोर दिया और कहा कि इससे रणनीतिक सोच और मानसिक मजबूती विकसित करने में मदद मिलती है।
तेंदुलकर ने कहा कि 'छिपे हुए हीरों' को पहचानने में कोच अहम भूमिका निभाते हैं जबकि अपने भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी बच्चों की ही होती है जो वे लगन और दृढ़ता से निभाते हैं।
अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा खेल के मैदानों से शुरू हुई थी और पहले दंतेवाड़ा जैसे इलाकों में ऐसी जगहों की कमी ने इस पहल को और भी अधिक सार्थक बना दिया है।
उन्होंने मार्गदर्शन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि इस पहल के तहत तय किया गया है कि विशेषज्ञ कोच लगभग 100 स्थानीय शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे जिससे कि वे छात्रों को प्रभावी ढंग से सलाह दे सकें।
तेंदुलकर ने कहा, ''ऊर्जा को दिशा की जरूरत होती है। सही मार्गदर्शन से प्रतिभा को निखारा जा सकता है और उसका महत्व बढ़ाया जा सकता है।''
छात्रों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यह खेलने और खेलों का आनंद लेने की उम्र है। हालांकि पढ़ाई भी उतनी ही जरूरी है और यह अच्छे दोस्त बनाने का भी समय है।
तेंदुलकर ने कहा कि उन्हें अपने पिता से जो सबसे महत्वपूर्ण सलाह मिली वह यह थी कि हमेशा एक अच्छे इंसान के तौर पर याद रखे जाने का प्रयास करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में लड़कियों की समान भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं हर परिवार की रीढ़ होती हैं और प्रगति के लिए उनकी भागीदारी जरूरी है।
तेंदुलकर ने बच्चों से बातचीत भी की और उनके साथ रस्साकशी और वॉलीबॉल जैसे खेल भी खेले।
इस कार्यक्रम में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं और विजेताओं को तेंदुलकर ने सम्मानित किया। स्थानीय कलाकारों और निवासियों ने उन्हें पारंपरिक हस्तशिल्प भेंट कर सम्मानित किया जबकि बच्चों ने कार्यक्रम के दौरान केक काटकर उनके आगामी जन्मदिन का जश्न मनाया।
इसस पहले जगदलपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए तेंदुलकर ने कहा, ''मुझे बहुत खुशी है कि हमने (मैदान कप पहल के तहत) लगभग 50 स्कूल में खेल के मैदान विकसित किए हैं।''
तेंदुलकर ने बताया कि दंतेवाड़ा में 'मैदान कप' प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है जिसे 'मान देसी' और 'सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन' का समर्थन प्राप्त है। इससे पांच हजार से अधिक बच्चों को फायदा हो रहा है।
दंतेवाड़ा कभी माओवादी हिंसा के लिए जाना जाता था। इसमें 2010 में ताड़मेटला (अब सुकमा जिले में) में हुआ वह हमला भी शामिल है जिसमें 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। यह जिला हालांकि अब एक बदलाव का गवाह बन रहा है।
भाषा सं सुधीर आनन्द
आनन्द
2204 1941 दंतेवाड़ा