बेअंत सिंह हत्या मामला : न्यायालय ने राजोआना की याचिका पर केंद्र से हलफनामा दाखिल करने को कहा
अविनाश
- 22 Apr 2026, 03:34 PM
- Updated: 03:34 PM
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका पर दो सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करे, जिसमें उसने दया याचिका पर निर्णय में देरी के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का अनुरोध किया है।
राजोआना 29 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद है, जिनमें से 15 वर्ष से अधिक समय उसने मौत के सजायाफ्ता कैदी के रूप में बिताए हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश वकील से पूछा, ''अब तक आपने जवाबी हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया?''
केंद्र के वकील ने कहा कि वे कुछ दस्तावेज अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में रखना चाहते हैं।
इस पर पीठ ने कहा, ''आप अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कीजिए, नहीं तो उसके (राजोआना के) आरोपों को चुनौती नहीं दी जा सकेगी। आप जो कहना चाहते हैं, अपने हलफनामे में कहिए।''
राजोआना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा मार्च 2012 में दायर दया याचिका अब भी लंबित है।
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने 2023 में कहा था कि संबंधित प्राधिकारी को दया याचिका पर फैसला लेना चाहिए।
रोहतगी ने 24 सितंबर 2024 के उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रतिवादियों की ओर से और स्थगन की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और स्पष्ट कर दिया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।
उच्चतम न्यायालय इससे पहले भी केंद्र सरकार को राजोआना की दया याचिका पर निर्णय लेने को कह चुका है।
उस समय केंद्र ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए कहा था कि दया याचिका विचाराधीन है।
सितंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय ने राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में मौत हो गई थी। एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को फांसी की सजा सुनाई थी।
राजोआना की याचिका में उसकी रिहाई के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
तीन मई 2023 को उच्चतम न्यायालय ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था और कहा था कि सक्षम प्राधिकारी उसकी दया याचिका पर विचार कर सकता है।
राजोआना ने 2024 में दायर नयी याचिका में कहा कि वह 28 वर्ष आठ महीने जेल में बिता चुका है, जिनमें 15 वर्ष से अधिक समय मौत के सजायाफ्ता कैदी के रूप में है।
उसने कहा कि एसजीपीसी ने मार्च 2012 में संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत उसकी ओर से दया याचिका दायर की थी।
याचिका में कहा गया है कि न्यायालय द्वारा सक्षम प्राधिकारी को दया याचिका पर समयानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है।
इसमें अप्रैल 2023 के उच्चतम न्यायालय के एक अन्य आदेश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सभी राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को लंबित दया याचिकाओं का जल्द और बिना अनावश्यक देरी के निपटारा करने को कहा गया था।
भाषा गोला अविनाश
अविनाश
2204 1534 दिल्ली