एनसीएलएटी ने जेपी एसोसिएट्स मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा
रमण
- 22 Apr 2026, 03:27 PM
- Updated: 03:27 PM
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को चुने जाने के खिलाफ दायर वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाओं पर बुधवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो-सदस्यीय पीठ ने वेदांता, समाधान पेशेवर (आरपी), कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों को दो दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।
मामले की सुनवाई के दौरान वेदांता के वकील ने जेएएल के कर्जदाताओं द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन मानदंडों पर सवाल उठाया। कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दे दी थी, जबकि वेदांता की 17,926 करोड़ रुपये की अधिक बोली को खारिज कर दिया गया था।
इससे पहले 24 मार्च को एनसीएलएटी ने वेदांता समूह की उस याचिका पर अंतरिम रोक देने से इनकार कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 17 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि एनसीएलएटी ने कहा था कि अंतिम फैसला अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा।
एनसीएलटी ने अपने आदेश में जेएएल के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की तरफ से लगाई गई बोली को मंजूरी दी थी।
वेदांता ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी थी लेकिन शीर्ष अदालत ने रोक देने से इनकार कर दिया। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जेएएल की निगरानी समिति कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से पहले न्यायाधिकरण की अनुमति ले।
कर्जदाताओं की समिति ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के प्रावधानों के अनुरूप है और केवल अधिक बोली लगाने से ही किसी बोलीदाता को स्वचालित रूप से चयन का अधिकार नहीं मिल जाता। योजना का मूल्यांकन अग्रिम नकदी, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन क्षमता जैसे कई कारकों के आधार पर किया गया।
जेपी समूह की प्रमुख कंपनी जेएएल को 57,185 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में चूक के बाद जून, 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
ऋणग्रस्त कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, होटल, बिजली और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा और नोएडा की बड़ी आवासीय परियोजनाएं, यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्पोर्ट्स सिटी, दिल्ली-एनसीआर में वाणिज्यिक संपत्तियां और उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में सीमेंट संयंत्र शामिल हैं।
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