कालेश्वरम परियोजना पर आयोग की रिपोर्ट के आधार पर केसीआर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी : अदालत
वैभव
- 22 Apr 2026, 02:38 PM
- Updated: 02:38 PM
हैदराबाद, 22 अप्रैल (भाषा) भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और तीन अन्य को बड़ी राहत देते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को निर्देश दिया कि कालेश्वरम सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच करने वाले पीसी घोष आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए।
केसीआर, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी. एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने हालांकि कहा कि आयोग का गठन न तो मनमाना है, न अवैध और न ही संविधान के विपरीत।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''...आयोग द्वारा दिए गए वे निष्कर्ष, जो याचिकाकर्ताओं के आचरण और प्रतिष्ठा के प्रतिकूल हैं तथा जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 8बी के तहत प्रदत्त वैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन करते हुए दिए गए हैं, प्रभावहीन माने जाएंगे और उनके आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।"
अदालत ने पिछले महीने इन याचिकाओं पर अपना फैसला 22 अप्रैल तक सुरक्षित रख लिया था।
उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.सी. घोष की अध्यक्षता वाले आयोग ने बीआरएस शासनकाल के दौरान कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच की थी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।
यह रिपोर्ट पिछले वर्ष अगस्त में राज्य विधानसभा में पेश की गई थी। इस पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के फैसले की घोषणा की थी।
अपनी रिपोर्ट में आयोग ने परियोजना निर्माण और अन्य पहलुओं में कथित अनियमितताओं के लिए चंद्रशेखर राव को जिम्मेदार ठहराया था। रिपोर्ट में केसीआर के भतीजे और बीआरएस सरकार में सिंचाई मंत्री रहे हरीश राव के साथ ही कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।
रिपोर्ट को चुनौती देते हुए केसीआर, हरीश राव और अन्य ने इसे रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
बीआरएस की कानूनी टीम के एक सदस्य ने दावा किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आयोग की रिपोर्ट ''व्यर्थ'' हो गई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सीबीआई आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अपनी जांच नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि आयोग ने एक "मौलिक त्रुटि" की, क्योंकि उसने अपने निष्कर्षों के समर्थन में उपलब्ध सामग्री पेश नहीं की और केसीआर व अन्य लोगों के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट तैयार करते समय उनसे स्पष्टीकरण भी नहीं मांगा।
उन्होंने कहा, "इसलिए आयोग की रिपोर्ट को केसीआर, हरीश राव और अन्य के खिलाफ किसी कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता।"
याचिकाकर्ताओं ने जांच आयोग की नियुक्ति को अवैध, असंवैधानिक और जांच आयोग अधिनियम के प्रावधानों से परे घोषित करने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने 31 जुलाई 2025 को आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए रद्द करने की भी मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का यह भी तर्क था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर जिरह करने का अवसर उन्हें नहीं दिया गया।
भाषा गोला वैभव
वैभव
2204 1438 हैदराबाद