न्यायालय ने पवन खेड़ा को राहत देने से इनकार किया, असम की अदालत का रुख करने को कहा
पारुल
- 17 Apr 2026, 05:44 PM
- Updated: 05:44 PM
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से संरक्षण देने का अनुरोध किया था।
शीर्ष अदालत ने खेड़ा से कहा कि वह इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत का रुख करें। उसने स्पष्ट किया कि राज्य की अदालत खेड़ा की याचिका पर बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी (यदि कोई हो) पर ध्यान दिए सुनवाई करेगी, चाहे वह इस न्यायालय द्वारा की गई हो या तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा।
खेड़ा ने पांच अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि हिमंत की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री ने नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के लिए दाखिल अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया है।
हिमंत और रिंकी ने इन आरोपों को झूठा एवं मनगढ़ंत बताया था।
न्यायालय का ताजा आदेश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने 15 अप्रैल को असम सरकार की याचिका पर संज्ञान लेते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय की ओर से खेड़ा को दी गई एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी।
शीर्ष अदालत के लगातार दो आदेश-पहला, तेलंगाना उच्च न्यायालय की ओर से दी गई ट्रांजिट जमानत पर रोक और दूसरा, 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार, असम पुलिस को कांग्रेस नेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का रास्ता दे सकते हैं।
खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "सिर्फ इसलिए कि मेरे मुवक्किल ने मुख्यमंत्री को नाराज कर दिया, यहां निजामुद्दीन स्थित उनके आवास पर करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात हैं।"
उन्होंने कहा कि इस पीठ को एकपक्षीय आदेश पारित करने के लिए राजी कर लिया गया।
सिंघवी ने कहा कि तेलंगाना उच्च न्यायालय की ओर से दी गई ट्रांजिट जमानत शुक्रवार को समाप्त हो रही है और गुवाहाटी उच्च न्यायालय सोमवार को खुलेगा।
उन्होंने खेड़ा की तरफ से कहा, "मुझे मंगलवार तक ट्रांजिट जमानत चाहिए, ताकि मैं असम जा सकूं। तेलंगाना में याचिका जल्दबाजी में दायर की गई थी। बहस के दौरान इस बारे में बताया गया और सही दस्तावेज दाखिल किया गया। मेरी पत्नी तेलुगु भाषी हैं और वह तेलंगाना में विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। उनका हलफनामा उसी दिन दाखिल किया गया था, लेकिन यह बात नहीं बताई गई।"
सिंघवी ने खेड़ा की तरफ से दलील दी, "क्या मैं कोई आदतन अपराधी हूं? मैं फरार होने वाला व्यक्ति नहीं हूं। माननीय न्यायालय को गुमराह किया गया है।"
उन्होंने शीर्ष अदालत से खेड़ा को कुछ दिनों की राहत देने का अनुरोध दिया, ताकि वह गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकें।
सिंघवी ने कहा कि मामला किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है और इसमें संविधान का अनुच्छेद-21 (जीवन का अधिकार) लागू होता है।
न्यायमूर्ति माहेश्वरी लगातार कहते रहे कि खेड़ा को असम की सक्षम अदालत में जाकर जल्द सुनवाई का अनुरोध करना चाहिए।
पीठ ने आदेश में कहा, "अंतरिम आवेदन आज सूचीबद्ध था। हम इसे इस टिप्पणी के साथ निस्तारित करते हैं कि प्रतिवादी (खेड़ा) सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत में जाने के लिए स्वतंत्र है।"
न्यायालय ने कहा, "यह स्पष्ट है कि ट्रांजिट जमानत संबंधी विवादित आदेश की तामील पर रोक लगाई गई थी। साथ ही प्रतिवादी को असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई थी। जब प्रतिवादी सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर करेगा, तो वह अदालत ट्रांजिट जमानत देने या उस पर रोक लगाने संबंधी इस अदालत के आदेश से प्रभावित नहीं होगी।"
पीठ ने कहा कि खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर "उसके अपने गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।"
उसने कहा कि अगर अदालत कार्यरत नहीं है, तो मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर कानून और प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार विचार होगा।
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में दाखिल खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका में तथ्यों को छिपाए जाने का आरोप लगाया और कहा कि सिंघवी "गलत बयान" दे रहे हैं।
मेहता पहले भी कह चुके हैं कि यह क्षेत्राधिकार का मामला है और खेड़ा की याचिका में यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया।
खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 175 (चुनाव से संबंधित झूठा बयान), धारा 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, "मामले के गुण-दोष पर कोई राय जाहिर किए बिना, अदालत का मत है कि याचिकाकर्ता सीमित अवधि की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पाने का हकदार है, क्योंकि उसकी गिरफ्तारी की आशंका उचित और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से समर्थित प्रतीत होती है।''
अग्रिम जमानत की शर्तों के तहत कहा गया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में खेड़ा को एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने पर रिहा किया जाएगा। इसमें कहा गया था कि कांग्रेस नेता को जांच में सहयोग करना होगा और जांच अधिकारी के बुलाने पर पूछताछ के लिए पेश होना होगा। शर्तों में कहा गया था कि वह सक्षम अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकेंगे।
यह भी शर्त लगाई गई थी कि खेड़ा निर्धारित अवधि के भीतर असम की सक्षम अदालत में उचित राहत मांगेंगे और सार्वजनिक व्यक्ति होने के नाते मामले से जुड़े विषय पर आगे कोई ऐसा सार्वजनिक बयान नहीं देंगे, जिससे जांच प्रभावित हो।
खेड़ा ने सात अप्रैल को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और हैदराबाद में अपना आवासीय पता बताया था। उन्होंने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाए।
भाषा गोला पारुल
पारुल
1704 1744 दिल्ली