महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी: प्रधानमंत्री मोदी
हक
- 16 Apr 2026, 04:31 PM
- Updated: 04:31 PM
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की और कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर अपने विचार रखते हुए यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ''हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया।''
मोदी ने कहा, ''2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सब ने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।''
उन्होंने कहा, ''अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है। वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।''
उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए विधेयक एक साथ लाने पर और कुछ राज्यों के साथ भेदभाव होने संबंधी कुछ विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा, ''संविधान ने हमें यहां बैठकर देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। ना टुकड़ों में सोच सकते हैं, न टुकड़ों में निर्णय ले सकते हैं। निराधार बात है, इसमें रत्ती भर सचाई नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए बवंडर खड़ा किया जा रहा है। मैं बड़ी जिम्मेदारी से आज सदन में कहना चाहता हूं कि दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो पश्विम हो, छोटे राज्य हों, बड़े राज्य हों..... निर्णय प्रकिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी।''
मोदी ने कहा, ''अतीत में जो सरकारें रहीं, जिनके कालखंड में परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।''
जब तमिलनाडु की एक सांसद ने गारंटी देने की बात कही तो प्रधानमंत्री ने कहा, ''अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा शब्द चाहें ते इसका इस्तेमाल करता हूं। तमिल में केोई अच्छा शब्द हो तो उसका इस्तेमाल करता हूं। नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की कोई जरूरत नहीं है।''
उन्होंने कहा कि जब 25-30 साल पहले महिला आरक्षण का विचार आया था तभी इसे लागू कर दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा, ''हम सब भाग्यवान हैं कि हमें देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सा बनाने का सौभाग्य मिला है।''
मोदी ने कहा कि ''हम सभी को इस अहंकार में नहीं रहना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उसका अधिकार है।''
उन्होंने कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि समय-समय पर सभी ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का समर्थन तो किया लेकिन किसी न किसी बहाने से इसे रोकने का प्रयास करते रहे।
उन्होंने कहा तरह-तरह की बहानेबाजी और चीजों को उलझाना अब नहीं चलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि मुझे इसका राजनीतिक लाभ होगा। लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को इसका लाभ नहीं होगा।''
उन्होंने विपक्षी दलों से कहा, ''हमें इसका श्रेय नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित हो जाए मैं कल विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद देकर, सबकी तस्वीर छपवाने को तैयार हूं। सामने से श्रेय का ब्लैंक चैक आपको दे रहा हूं।''
उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, ''राष्ट्र जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनस्थिति और नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैद करके एक राष्ट्र की अमानत बना देते हैं, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देते हैं।
मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसा ही पल है।''
उन्होंने कहा, ''हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वो देश की राजनीति के रूप-स्वरूप को तो तय करेगा ही, देश की दशा और दिशा भी तय करने वाला है।''
मोदी ने कहा, ''हम पहले ही देरी कर चुके हैं। कारण कुछ भी हों, जिम्मेदार कोई भी हो।''
मोदी ने कांग्रेस की सरकार में पंचायतों में आरक्षण दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि ''उस समय ऐसी चर्चा होती थी कि पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, क्योंकि उसमें उन्हें खुद का पद जाने का डर नहीं लगता।''
उन्होंने कहा, ''आज लाखों पंचायत प्रतिनिधि महिलाएं आंदोलित हैं। वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो। और निर्णय प्रक्रिया विधानसभाओं और संसद में होती हैं।''
उन्होंने महिला आरक्षण में ओबीसी कोटे की समाजवादी पार्टी के सदस्यों की मांग पर कहा, ''मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। लेकिन मेरा दायित्व समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है।''
मोदी ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए यह भी कहा कि आज देश के हर क्षेत्र में ''देश की बेटियों का इतना बड़ा सामर्थ्य देखने को मिल रहा है। हम उन्हें यहां आने से रोकने में इतनी ताकत क्यों लगा रहे हैं। इसे राजनीतिक तराजू से मत तौलिए। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।''
उन्होंने कहा, ''आज पूरा देश, विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय को तो देखेगी ही, निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।''
उन्होंने कहा कि 2023 में जब विधेयक पारित किया गया था तो सभी कह रहे थे कि इसे जल्दी लागू करो।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''2024 में यह संभव नहीं था। इतने कम समय में नहीं हो पाता। अगर हम 2029 (के लोकसभा चुनाव) में इसे लागू कर सकते हैं, तब भी नहीं करेंगे तो महिलाओं में विश्वास नहीं बना पाएंगे कि सच में प्रयास कर सकते हैं।''
उन्होंने कहा, ''मेरा आग्रह है कि यह अवसर है कि पुरानी जो भी मुश्किलें रहीं, उनसे बाहर निकलें। हिम्मत से आगे बढ़ें। और नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें तथा इस विधेयक को सर्व सम्मति से इसे पारित करें।''
भाषा
वैभव हक
हक
1604 1631 संसद