दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना वन्यजीव गलियारा वन्यजीवों का सुरक्षा कवच बनेगा: उनियाल
जोहेब
- 13 Apr 2026, 11:35 PM
- Updated: 11:35 PM
देहरादून, 13 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सोमवार को कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना 12 किलोमीटर का एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा और इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उदघाटन करेंगे। इससे एक दिन पूर्व यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उनियाल ने कहा कि यह एलिवेटेड गलियारा विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
वन मंत्री ने बताया कि एक्सप्रेसवे का आखिरी 20 किलोमीटर का भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना में 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन की दृष्टि से विकसित किया गया है, इसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीवों के लिए भी पास बनाए गए हैं ताकि उनकी निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
उनियाल ने बताया कि परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए गए। इसके अंतर्गत 'साउंड बैरियर एवं लाइट बैरियर' जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश का न्यूनतम प्रभाव पड़े।
वन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस एलिवेटेड गलियारे के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि गलियारे के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी जो 60-68 लाख पेड़ों द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के बराबर है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इससे 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।
वन मंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे परियोजना से पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी लेकिन वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से केवल 11,160 पेड़ों को ही काटना पड़ा और बाकी पेड़ सुरक्षित बच गए।
वन मंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है। उन्होंने बताया कि कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया है जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की निगरानी समिति के निर्देशन में 40 करोड़ रु की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्यजीव सरंक्षण हेतु पारिस्थितिकी बहाली के विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं ।
भाषा दीप्ति जोहेब
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