यमुना खादर के पुराने गांवों को हटाने की किसी भी कोशिश का विरोध : दिल्ली पंचायत संघ
माधव
- 08 Jun 2026, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) दिल्ली पंचायत संघ ने यमुना खादर क्षेत्र में स्थित पुराने गांवों को 'ओ-जोन' नियमों के तहत हटाने की किसी भी संभावित कार्रवाई का विरोध किया है और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री तथा दिल्ली के उपराज्यपाल से इन गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।
पंचायत संघ ने एक बयान में कहा कि यमुना नदी के किनारे बसे यह गांव सदियों पुराने हैं और उनकी अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक पहचान है।
संघ ने कहा कि इन बस्तियों का किसी भी प्रकार का विस्थापन अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य होगा।
दिल्ली पंचायत संघ के अध्यक्ष थान सिंह यादव ने कहा, "हाल ही में कई स्थानों पर 'ओ-जोन' के साइनबोर्ड लगाए गए हैं। इससे लोगों में भय का माहौल है कि कहीं उनका घर अगला निशाना न बन जाए।"
उन्होंने कहा, " 'ओ-जोन' वजीराबाद से ओखला तक लगभग 22 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इन क्षेत्रों में लाखों लोग रहते हैं। ये कोई नए गांव नहीं हैं, बल्कि सदियों पुराने हैं। इस तरह का व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं चलाया जा सकता।"
दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के तहत यमुना बाढ़क्षेत्र को 'ओ-जोन' घोषित किया गया है। इसका अर्थ है कि यह क्षेत्र संरक्षित नदी तल एवं बाढ़क्षेत्र है, जहां किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह भूमि नदी के अतिरिक्त जल को समाहित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए निर्धारित की गई है।
यमुना बाढ़क्षेत्र में संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 100 कॉलोनियां आती हैं और इसमें करीब 15 लाख मकान शामिल हैं, जिन पर ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है।
यादव ने कहा कि राजधानी के कई गांव लंबे समय से यमुना के भूभाग का हिस्सा रहे हैं और लुटियंस दिल्ली के निर्माण सहित अतीत के विकास के कारण पहले ही ग्रामीण भूमि और पहचान का नुकसान हो चुका है।
उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति दोबारा नहीं दोहराई जानी चाहिए और इन गांवों को 'ओ-जोन' नियमों के प्रभाव से संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।"
दिल्ली पंचायत संघ के अध्यक्ष ने दिल्ली के सभी सांसदों और विधायकों से गांवों तथा ग्रामीण समुदायों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि संगठन इस मुद्दे पर चर्चा के लिए शीघ्र ही जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेगा।
संघ ने कहा कि आधुनिक तकनीक और संसाधनों की उपलब्धता के साथ पर्यावरण संरक्षण और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। उसने आग्रह किया कि गांवों को हटाने के बजाय उनकी सुरक्षा, आधारभूत ढांचे के विकास और ग्रामीण विरासत के संरक्षण पर ध्यान दिया जाए।
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