आईएसआई से जुड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, सीसीटीवी कैमरों से रखते थे सेना की आवाजाही पर निगाह
अविनाश
- 10 Apr 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से सीधे जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिससे पता चला कि सीमा पार बैठे लोग उत्तरी भारत के रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
निगरानी नेटवर्क में पंजाब के कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला और मोगा, हरियाणा के अंबाला, जम्मू-कश्मीर का कठुआ और राजस्थान के बीकानेर और अलवर जैसे शहर शामिल थे। इन सभी शहरों में सेना की छावनियां हैं तथा ये अंतरराष्ट्रीय सीमा से नजदीक हैं।
पुलिस के अनुसार, कैमरों को जानबूझकर सैन्य प्रतिष्ठानों, सैनिकों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले राजमार्गों और सीमा से जुड़े बुनियादी ढांचे के पास लगाया गया था ताकि गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके।
इस मॉड्यूल से जुड़ी सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये उपकरण पाकिस्तान में बैठे आकाओं को लाइव फुटेज पहुंचा रहे थे जिससे वे सीमा पार बैठकर भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रख पा रहे थे।
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने समन्वित अभियान में इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मॉड्यूल में जासूसी, हथियारों की तस्करी और रेकी की गतिविधियां शामिल हैं।
आरोपियों की पहचान पंजाब में तरनतारन निवासी मनप्रीत सिंह, फिरोजपुर निवासी अनमोल और साहिल, कपूरथला निवासी गुरजीत, फाजिल्का निवासी रिम्पलदीप, सलविंदर उर्फ कालू और बूटा सिंह, और मोगा निवासी हरप्रीत तथा दिल्ली निवासी अतुल राठी, रोहित और अजय के रूप में हुई है।
जांचकर्ताओं ने कहा कि यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के निर्देशों के तहत काम कर रहा था, जिसके जमीनी स्तर पर मौजूद एजेंटों को निगरानी उपकरण स्थापित करने और संवेदनशील दृश्यों को प्रसारित करने का काम सौंपा गया था।
सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों के उपयोग से दूरस्थ या कम पहुंच वाले क्षेत्रों में भी निर्बाध निगरानी सुनिश्चित हुई, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो गया और नेटवर्क पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भर किए बिना लगातार काम कर सका।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) प्रमोद सिंह कुशवाह ने कहा, "कैमरों में फर्जी पहचान का उपयोग करके प्राप्त किए गए सिम कार्ड लगाए गए थे और उन्हें मोबाइल एप्लिकेशन से जोड़ा गया था, जिससे सीमा पार फुटेज का निर्बाध वास्तविक समय प्रसारण संभव हो सका।"
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने उपकरण लगाने से पहले विस्तृत रेकी की थी और सावधानीपूर्वक ऐसे स्थान चुने थे जहां से सेना की छावनियों, सीमावर्ती सड़कों और सुरक्षा बलों के आवागमन मार्गों को स्पष्ट रूप से देखा जा सके। इसके बाद पाकिस्तान में मौजूद आकाओं ने फुटेज का विश्लेषण करके पैटर्न का पता लगाया, कमजोरियों का आकलन किया और आगे की संभावित गतिविधियों की योजना बनाई।
अधिकारी ने कहा, "इरादा केवल निगरानी का नहीं था, बल्कि एक निश्चित अवधि में रक्षा गतिविधियों के पैटर्न की रणनीतिक निगरानी का था।" उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारियों का इस्तेमाल आतंकी हमलों की साजिश रचने या सीमापार अभियानों को सुविधाजनक बनाने के लिए किया जा सकता था।
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई दो चरणों में की गई।
अधिकारी के मुताबिक, विशेष प्रकोष्ठ की टीमों द्वारा चलाए गए पहले अभियान में पंजाब और दिल्ली से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने नौ सीसीटीवी कैमरे, तीन विदेश निर्मित पिस्तौल और 24 कारतूस बरामद किए।
उन्होंने बताया कि सैन्य खुफिया इकाई की जानकारी पर चलाए गए दूसरे अभियान में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो रेकी व डेटा साझा करने में शामिल थे।
अधिकारी ने बताया, "मुख्य आरोपियों में से एक, पंजाब निवासी मनप्रीत सिंह, पाकिस्तान स्थित आकाओं के सीधे संपर्क में पाया गया और उसने संचार समन्वय और अवैध हथियारों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभाई।"
अधिकारी ने बताया, "जमीन मौजूद एजेंट सहित अन्य लोग कैमरों को लगाने और जमीनी स्तर पर नेटवर्क को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे।"
पुलिस ने कहा कि इस कार्रवाई से एक बड़ा सुरक्षा खतरा टल गया है, क्योंकि मिली जानकारी के अनुसार यह गिरोह विस्फोटकों और अन्य साधनों का उपयोग करके सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की फिराक था।
सुरक्षा एजेंसियां अब मोबाइल फोन और सीसीटीवी प्रणाली से प्राप्त डेटा सहित डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं, ताकि आकाओं और 'स्लीपर सेल' की पहचान की जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव है।
भाषा नोमान नोमान अविनाश
अविनाश
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