भाजपा के बंगाल में यूसीसी लाने के वादे से चुनावी लड़ाई तीखी हुई
दिलीप
- 10 Apr 2026, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
कोलकाता, 10 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल चुनाव की निर्णायक वैचारिक लड़ाई का बिगुल फूंकते हुए शुक्रवार को अपने घोषणापत्र को सार्वजनिक किया, जिसमें सत्ता में आने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को इस वादे से हिंदू मतों को एकजुट करने में मदद मिल सकती है, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर से अपने मजबूत आधार अल्पसंख्यक मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश कर सकती है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोलकाता में भाजपा के 'संकल्प पत्र' को जारी करते हुए कहा कि बंगाल में धर्म से परे 'प्रत्येक नागरिक के लिए एक ही कानून होगा'।
उन्होंने कहा, ''भाजपा शासित कई राज्यों ने समान नागरिक संहिता लागू कर दी है। छह महीने के भीतर, हम बंगाल में भी इसे लागू करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो।''
भाजपा के घोषणापत्र में यूसीसी के वादे के साथ-साथ घुसपैठ और मवेशी तस्करी को रोकने का भी संकल्प लिया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने इसी के साथ सीमा सुरक्षा और 'तुष्टीकरण की राजनीति' पर आधारित चुनावी विमर्श को बल मिलेगा।
यूसीसी सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने को विनियमित करने का एक समान कानून है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा की यह लंबे समय से एक प्रमुख मांग रही है।
भाजपा ने 23 अप्रैल को मतदान होने से ठीक दो सप्ताह पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। यूसीसी का मुद्दा ऐसे समय उठाना राज्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हैं और 294 सदस्यीय विधानसभा सीट में से 110 पर अल्पसंख्यक आबादी निर्णायक भूमिका में है।
शाह ने इस मुद्दे को धार्मिक प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता के प्रश्न के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा, ''मुझे एक बात बताइए। संविधान इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। क्या सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना तुष्टीकरण है? या फिर तुष्टीकरण तब है जब एक नागरिक को चार विवाह करने की अनुमति है और दूसरे को केवल एक? यूसीसी तुष्टीकरण को समाप्त करता है।''
शाह ने इस मुद्दे पर भाजपा की आलोचना का जवाब देते हुए कहा, ''समान नागरिक संहिता की सिफारिश भाजपा की नहीं, बल्कि संविधान सभा की थी। तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ही यूसीसी इतने लंबे समय तक लागू नहीं हो पाई।''
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि शाह की टिप्पणियों को भाजपा द्वारा चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने के सबूत के तौर पेश किया।
तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने यूसीसी की घोषणा को ''मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का एक सुनियोजित प्रयास'' बताया। उन्होंने भाजपा पर अल्पसंख्यकों के बीच भय फैलाकर हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूर्व में यूसीसी की आलोचना करते हुए इसे भारत के बहुलवादी चरित्र पर हमला बता चुकी हैं और उन्होंने इसे सुधार के नाम पर बहुसंख्यकवादी एजेंडा थोपने का प्रयास करार दिया था।
तृणमूल नेताओं ने निजी बातचीत में कहा कि भाजपा द्वारा यूसीसी का मुद्दा प्रमुखता से उठाना सत्तारूढ़ पार्टी के लिए मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि इससे मुस्लिम वोटों के कुछ वर्गों में हाल तक दिख रहा बिखराव रुक सकता है।
तृणमूल गत दो महीनों से मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर 24 परगना के कुछ हिस्सों के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में एक असामान्य चुनौती का सामना कर रही थी, जहां इंडियन सेकुलर फ्रंट, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) और तृणमूल से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी जैसे छोटे संगठन खुद को एक 'स्वतंत्र मुस्लिम आवाज' के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप
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