टीबी के नए टीके सुरक्षित, लेकिन हो सकता है कि संक्रमण के सभी स्वरूपों से सुरक्षा प्रदान न करें
माधव
- 10 Apr 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) क्षय रोग (टीबी) के दो नए टीके भारत में वयस्कों और बच्चों के लिए सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन हो सकता है कि ये संक्रामक जीवाणु रोग के सभी स्वरूपों से सुरक्षा प्रदान न करें। यह बात 'ब्रिटिश मेडिकल जर्नल' में प्रकाशित तीसरे चरण के परीक्षण परिणामों में कही गई है।
चरण-3 अंतिम दौर का अध्ययन है जिसमें सुरक्षा और प्रभावकारिता का निर्धारण करने के लिए एक नए उपचार की तुलना वर्तमान प्रक्रिया से की गई है।
अनुसंधानकर्ताओं ने टीबी के मामलों को कम करने में दो नए टीकों - वीपीएम1002 और इम्यूवैक - की सुरक्षा एवं प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए 'प्रीवेंटबी' नामक परीक्षण किया।
अध्ययन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसंधानकर्ता भी शामिल रहे।
भारत में, टीबी से बचाव के लिए शिशुओं को जन्म के समय 'बैसिलस कैलमेट-गुएरिन' (बीसीजी) नामक टीका लगाया जाता है। वीपीएम1002 पुन: संयोजन वाला बीसीजी टीका है जिसे जर्मनी आधारित कंपनी 'सीरम लाइफ साइंस यूरोप जीएमबीएच' द्वारा विकसित किया गया है।
पुन: संयोजन वाले टीके में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करने के लिए किसी रोगजनक से एंटीजन उत्पन्न करने के लिए आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया जाता है।
'इम्मुवैक' को आईसीएमआर और अहमदाबाद आधारित कैडिला फार्मास्युटिकल्स द्वारा विकसित किया गया है तथा यह रोगजनक के गैर-संक्रामक स्वरूप का उपयोग करके बनाया गया एक निष्क्रिय तत्व टीका है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि हालांकि बीसीजी टीका छोटे बच्चों में टीबी के गंभीर स्वरूपों के खिलाफ प्रभावी है, लेकिन यह किशोरों और वयस्कों को सुरक्षा प्रदान नहीं करता।
जुलाई 2019 से दिसंबर 2020 के बीच दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित छह राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के 18 स्थानों से टीबी रोगियों के छह वर्ष और इससे अधिक आयु के 12,700 से अधिक घरेलू संपर्कों का विश्लेषण किया गया।
प्रतिभागियों को 'रैंडम' रूप से वीपीएम1002, इम्यूवैक या प्लेसीबो की खुराक प्राप्त करने को कहा गया (प्रत्येक समूह में 4,239 प्रतिभागी) और 38 महीनों तक उनका उन पर नजर रखी गई।
इसके एक महीने बाद 11,829 प्रतिभागियों को दूसरी खुराक दी गई। कुल 12,295 प्रतिभागियों (नामांकित लोगों में से 96.7 प्रतिशत) ने 38 महीने की अनुवर्ती प्रक्रिया पूरी की।
दोनों टीके सुरक्षित पाए गए और इनसे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई।
अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ''दोनों टीके सुरक्षित पाए गए लेकिन इनकी सूक्ष्म-जैव वैज्ञानिक रूप से पुष्टि वाली टीबी या पल्मोनरी टीबी के सभी स्वरूपों के खिलाफ कोई प्रभावकारिता नहीं दिखी।''
परीक्षणों में यह भी पाया गया कि यद्यपि दोनों में से किसी भी टीके ने टीबी के खिलाफ सामान्य सुरक्षा प्रदान नहीं की या सुप्त टीबी संक्रमण को नहीं रोका, लेकिन दोनों ने उन लोगों में सक्रिय टीबी में प्रगति रोकने की क्षमता प्रदर्शित की, जिन्हें सुप्त टीबी हो गया था।
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, हालांकि, वीपीएम1002 ने सभी आयु समूहों में, जिनमें 36-60 वर्ष की आयु के लोग भी शामिल हैं, एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ 50.4 प्रतिशत प्रभावशीलता दिखाई।
यह परिणाम सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से महत्वपूर्ण लाभ का संकेत देता है, क्योंकि फेफड़ों के अलावा अन्य अंगों को भी प्रभावित करने वाली एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी अक्सर पल्मोनरी टीबी की तुलना में मृत्यु के उच्च जोखिम से जुड़ी होती है।
बच्चों में, वीपीएम1002 ने छह से 14 वर्ष से कम आयु वर्ग में 'पल्मोनरी' और 'एक्स्ट्रापल्मोनरी' टीबी सहित सभी प्रकार की टीबी से सुरक्षा प्रदान की, जबकि इम्यूवैक ने छह से 10 वर्ष से कम आयु वर्ग में केवल 'एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी' से सुरक्षा प्रदान की।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि हालांकि, दोनों में से किसी भी टीके ने कम वजन वाले बच्चों और वयस्कों को सुरक्षा प्रदान नहीं की, जिससे पता चलता है कि टीकाकरण के साथ-साथ पोषण संबंधी सहायता की भी आवश्यकता हो सकती है, खासकर छोटे बच्चों के लिए।
भाषा
नेत्रपाल माधव
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