केंद्र को महिला आरक्षण विधेयक पर व्यापक परामर्श करना चाहिए: माकपा
मनीषा
- 10 Apr 2026, 05:41 PM
- Updated: 05:41 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को विधायी निकायों में महिला आरक्षण के प्रस्तावित कानून और संबंधित परिसीमन प्रक्रिया पर व्यापक परामर्श करना चाहिए। माकपा ने कहा कि इस परिसीमन प्रक्रिया से लोकसभा सीट की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
यहां जारी एक बयान में माकपा के पोलित ब्यूरो ने कहा कि वह संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के अनिवार्य आरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन प्रस्तावित कानून इसे सीट संख्या में बढ़ोतरी से जोड़ता है।
माकपा ने कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में प्रस्तावित जनगणना और परिसीमन से महिला आरक्षण को जोड़ने का विरोध करने के बावजूद, उसने इस विधेयक का समर्थन किया है।
माकपा ने कहा कि उसने इस विधेयक का ठीक उसी तरह समर्थन किया है जैसे उसने वर्ष 2008 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा लाए गए संविधान के 108वें संशोधन का समर्थन किया था जिसमें विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट के अनिवार्य आरक्षण का प्रस्ताव था।
पोलित ब्यूरो ने बयान जारी करके कहा, ''उस समय भी हमने कहा था कि परिसीमन के साथ जुड़ाव से इतनी देरी होगी कि महिलाओं को न केवल 2024 के चुनाव में, बल्कि 2029 के चुनाव में भी एक तिहाई सीट पाने के अपने अधिकार से वंचित होना पड़ेगा।''
इसमें कहा गया कि दो साल बीत जाने के बाद भी न तो परिसीमन आयोग का गठन हुआ और न ही वादे के मुताबिक जनगणना शुरू हुई, ऐसे में मोदी सरकार ने विपक्षी दलों से बिना किसी चर्चा के एक बार फिर नए प्रस्ताव पेश किए, जबकि बार-बार सर्वदलीय बैठक की मांग की गई थी।
माकपा ने कहा कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में इस तरह का प्रस्ताव पेश करना बेहद आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है। पार्टी का आरोप है कि प्रस्तावित कानून 'चुनावी लाभ के संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित' है।
माकपा ने मांग की कि सीटों में वृद्धि के प्रभावों के संबंध में सभी राजनीतिक दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा और परामर्श के लिए प्रस्तावों को स्थगित किया जाए।
बयान में कहा गया, ''हम दोहराते हैं कि मौजूदा ढांचे के तहत 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है, जिसके लिए जनगणना और परिसीमन से महिला आरक्षण को अलग करने के लिए संशोधन की आवश्यकता होगी। लेकिन स्पष्ट रूप से मोदी सरकार में ऐसा करने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।''
माना जा रहा है कि बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन मसौदा विधेयकों को मंजूरी दे दी जिनका उद्देश्य 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करना और लोकसभा सीट की संख्या बढ़ाकर 816 करना है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी गई।
संविधान संशोधन विधेयक अधिनियम में कुछ बदलाव करेगा, वहीं एक अन्य सामान्य विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करके निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
एक अन्य विधेयक दिल्ली, जम्मू और कश्मीर तथा पुडुचेरी (विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेश) में इस कानून के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगा।
सरकार ने संसद के बजट सत्र को बढ़ा दिया है और 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जहां संशोधन विधेयक के पारित होने की उम्मीद है।
भाषा संतोष मनीषा
मनीषा
1004 1741 दिल्ली