शराब घोटाला: केजरीवाल और सिसोदिया को सीबीआई की याचिका पर जवाब देने के लिए मिला समय
नरेश
- 16 Mar 2026, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आबकारी नीति मामले में दोषमुक्त किये जाने के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर जवाब देने के लिए समय दे दिया।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख तय की।
न्यायाधीश ने पाया कि केजरीवाल और अन्य आरोपी सुनवाई के पहले दिन उपस्थित नहीं हुए और जब उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया तो अब वे ऐसा करने के लिए और समय मांग रहे हैं।
सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय का त्रुटिग्रस्त आदेश जरूरत के बाद एक सेकंड के लिए भी रिकॉर्ड पर नहीं रहना चाहिए और केजरीवाल व अन्य लोगों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह से अधिक का समय नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब अधीनस्थ न्यायालय का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो जवाब देना जरूरी नहीं है।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने बताया कि उन्होंने इस मामले को चुनौती देते हुए पहले ही उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी है।
पीठ ने टिप्पणी की, ''हमें अब तक कोई स्थगन आदेश नहीं मिला है। जब तक न्यायालय कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश नहीं देता, मामले की सुनवाई जारी रहेगी।''
मेहता ने जोर देकर कहा कि केजरीवाल को अपील दायर करने का अधिकार है लेकिन अगर इस आधार पर स्थगन की मांग की जा रही है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि याचिका इस सप्ताह उच्चतम न्यायालय में सूचीबद्ध हो और वे इसे शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में लंबित नहीं रख सकते।
उन्होंने कहा, "यह एक चलन बन गया है। आरोप लगाओ और भाग जाओ। ऐसे याचिकाकर्ताओं को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। आरोपों से ही उनका करियर बना है।"
हरिहरन ने कहा, "वह (केजरीवाल) शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के प्रभारी नहीं हैं और जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए।"
अदालत ने कहा, "आज से तीन सप्ताह बाद छह अप्रैल को इस मामले की सुनवाई होगी।"
आरोपियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि कोई जल्दबाजी नहीं है और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए।
वकीलों ने जोर देकर कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय दिए जाने से सीबीआई को कोई नुकसान नहीं होगा। मेहता ने कहा कि यह आदेश "प्रणाली को नुकसान पहुंचा रहा है।"
अधीनस्थ न्यायालय ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था तथा सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतरता और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ है।
भाषा जितेंद्र नरेश
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