यदि सरकारी योजनाओं का सुदृढ़ कार्यान्वयन होता तो गांवों की हालत बदल चुकी होती: कांग्रेस
माधव
- 10 Mar 2026, 05:10 PM
- Updated: 05:10 PM
नयी दिल्ली, दस मार्च (भाषा) सरकार पर वास्तविक आंकड़े बताने की जगह लोकलुभावन तस्वीर दिखाने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस ने कहा कि यदि सरकारी योजनाओं का सुदृढ़ कार्यान्वयन होता तो गांवों की हालत बदल चुकी होती।
उच्च सदन में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस की रजनी अशोकराव पाटिल ने कहा कि गांवों को सशक्त करने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी लेकिन कागजों पर आंकड़े अलग हैं और वास्तविक स्थिति अलग है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में केवल चार फीसदी की वृद्धि की गई और 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की बात करने वाली सरकार खुद यह सोचे कि क्या यह वृद्धि पर्याप्त है।
पाटिल ने कहा कि सरकार ऐतिहासिक कदम उठाने का दावा करती है लेकिन यह नहीं देखती कि उसके कथित ऐतिहासिक कदमों से लाभान्वित कितने लोग हुए। ''यदि सरकारी योजनाओं का सुदृढ़ कार्यान्वयन होता तो गांवों की हालत बदल चुकी होती।''
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि पिछले कई वर्षों में कई अहम योजनाओं के बजट में कमी आई है तो कई योजनाओं के लिए आवंटित बजट ही पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया। गरीबों की मददगार सबसे बड़ी योजना मनरेगा है जो मांग आधारित रोजगार योजना है और सरकार ने इसका नाम बदल दिया।
पाटिल ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का नाम बदल कर इसे सरकार ने वीबी जी राम जी योजना कर दिया। ''लेकिन यह नहीं सोचा गया कि किसी भी नीति को बनाते समय सबसे कमजोर व्यक्ति को ध्यान में रखने की महात्मा गांधी की सोच क्या इसमें चरितार्थ हो रही है।''
उन्होंने कहा कि बीते दस साल में क्या सबको सौ दिन भी रोजगार मिल पाया जो सरकार ने 125 दिन रोजगार देने का प्रावधान कर दिया ? ''कई बार तो लोगों को रोजगार मांगने पर भी नहीं मिला। आपका रोजगार का वादा केवल वादा ही रहा उल्टे आपने गरीबों को रोजगार से ही दूर कर दिया।''
पाटिल ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना के लिए बजटीय प्रावधान भी नाकाफी है, ऊपर से राज्यों पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया। ''क्या ऐसा राज्यों को दबाव में लाने के लिए किया गया है ?''
उन्होंने कहा कि कई राज्यों में घोषित मजदूरी दर और वास्तविक मजदूरी दर में अंतर देखा गया है। मजदूरी दर 2009 के आधार पर तय की गई है लेकिन इतने साल में तो महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। ''केवल नाम बदलने से परिणाम कैसे बदलेंगे ?''
पाटिल ने मांग की कि नयी व्यवस्था में मजदूरी दर को महंगाई से जोड़ा जाए और सामाजिक सुरक्षा को अनिवार्य बनाया जाए तथा राज्यों पर वित्तीय बोझ न डाला जाए तो बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आश्रय देना था। लेकिन तय लक्ष्य अधूरा है और तीस फीसदी मकान पूरे नहीं हो पाए हैं। ''54917 करोड़ रुपये का प्रावधान 2025-26 के लिए है लेकिन बीते बरस तो आवंटित धन का पूरा व्यय ही नहीं हो पाया है। अब अगले साल की क्या उम्मीद की जाए।''
उन्होंने कहा कि गरीबों को मकान बनाने के लिए जो राशि दी जाती है उसे बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि महंगाई की वजह से हर सामग्री महंगी हो चुकी है और संसदीय समिति भी इस राशि को बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी है।
पाटिल ने कहा कि आज टिकाऊ, सुरक्षित और समय पर मजबूत मकान बनाने के लिए बेहतर नीति बनाई जाए, यह जरूरी है, तब ही यह योजना सार्थक हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 8.3 लाख किमी सड़कों के निर्माण की मंजूरी दी गई थी और 90 फीसदी सड़कें बन चुकी हैं। '' यह एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन सड़क बनाना ही जरूरी या पर्याप्त नहीं है। इनकी गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन होने से और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ आदि के कारण सड़कें खराब हो जाती हैं। इस ओर सरकार कब ध्यान देगी। रखरखाव की तो बात बहुत दूर की है।''
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि महंगाई बढ़ती जा रही है। ''अभी जो दो सौ और चार सौ रुपये पेंशन के तौर पर मिलते हैं, उसमें दवा और भोजन की व्यवस्था संभव नहीं है।''
भाषा मनीषा माधव
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