उच्च न्यायालय ने निजी विद्यालयों को शुल्क विनियमन समिति गठित करने के आदेश को स्थगित किया
प्रशांत
- 28 Feb 2026, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी विद्यालयों को 'स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति' (एसएलएफआरसी) गठित करने के दिल्ली सरकार के आदेश का अनुपालन शनिवार को स्थगित कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, एसएलएफआरसी का गठन स्थगित रहेगा और स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही फीस वसूलने के हकदार होंगे जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूली थी।
पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
पीठ ने यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर दिया। याचिकाओं में दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था जिसमें विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी गठित करने को कहा गया था।
याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स, द फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स, फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल, रोहिणी एजुकेशनल सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि एक फरवरी की अधिसूचना में दी गई समय-सीमा के तहत, आगामी सत्र के लिए प्रत्येक स्कूल की फीस एक अप्रैल से पहले तय होने की संभावना नहीं है।
उसने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में यह प्रावधान है कि स्कूल अधिनियम के प्रावधानों के तहत फीस निर्धारित या अनुमोदित होने तक पिछले शैक्षणिक वर्ष की फीस वसूल सकते हैं, इसलिए यदि इस स्तर पर अधिसूचना को स्थगित कर दिया जाता है तो कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अदालत ने कहा कि यदि अधिसूचना पर रोक लगा दी जाती है तो छात्रों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी क्योंकि मामले की सुनवाई के दौरान ली गई कोई भी फीस याचिकाओं के परिणाम के अधीन होगी और विद्यालयों को किसी भी अतिरिक्त राशि को वापस करने के लिए उत्तरदायी होना पड़ेगा।
अदालत ने कहा, "याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान एसएलएफआरसी के गठन को स्थगित करना उचित होगा, क्योंकि इस पर अंतिम निर्णय 12 मार्च, 2026 को होगा।"
विद्यालयों ने दावा किया कि यह अधिसूचना कानूनी रूप से टिकती नहीं है क्योंकि यह दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में एसएलएफआरसी के गठन के लिए निर्धारित समयसीमा को बदलती है।
सरकार ने हालांकि कहा कि अधिनियम में दी गई "तिथियां" ना तो "अपरिवर्तनीय" हैं और न ही इसकी "बुनियादी संरचना" का हिस्सा हैं, इसलिए इन समय-सीमाओं में मामूली फेरबदल मान्य होगा।
सरकार ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य विद्यालयों के व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना है और अधिसूचना से विद्यालयों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
अदालत ने 34 पृष्ठों के फैसले में कहा कि अधिसूचना में निर्धारित समय-सीमा, याचिकाओं की सुनवाई में लगने वाले समय को देखते हुए, प्रथम दृष्टया "व्यावहारिक नहीं" प्रतीत होती हैं।
अदालत ने कहा कि यदि एसएलएफआरसी सर्वसम्मति से किसी सहमति पर नहीं पहुंच पाती है, तो स्कूल प्रबंधन को अधिनियम के अनुसार 15 दिनों के भीतर निर्णय के लिए मामले को जिला फीस अपीलीय समिति के पास भेजना होगा, लेकिन अधिसूचना में अपीलीय समिति को मामला भेजने के लिए एक संशोधित समयसीमा का उल्लेख नहीं है।
अदालत ने कहा, ''यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि प्रत्येक स्कूल द्वारा गठित एसएलएफआरसी प्रस्तावित फीस को सर्वसम्मति से मंजूरी दे पाएगी।"
अदालत ने कहा, ''यदि किसी भी एसएलएफआरसी द्वारा प्रस्तावित फीस को सर्वसम्मति से अनुमोदित नहीं किया जा सके, तो अगला कदम मामले को जिला फीस अपील समिति के पास भेजना है। हालांकि, अधिसूचना में जिला फीस अपील समिति को मामला भेजने की संशोधित समयसीमा का उल्लेख नहीं है। साथ ही, अधिनियम स्कूलों को जिला फीस अपील समिति के समक्ष मामला लंबित रहने के दौरान पिछले शैक्षणिक वर्ष का शुल्क वसूलने की अनुमति देता है।''
अदालत ने यह भी माना कि आवश्यक ऑडिट की गई वित्तीय विवरणियों की अनुपलब्धता एक ''व्यावहारिक कठिनाई'' है। अदालत ने कहा कि साथ ही, अंतिम परीक्षा जारी रहने के दौरान समिति के चयन के लिए अभिभावकों की भौतिक बैठक आयोजित करने की आवश्यकता को देखते हुए अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि सुविधा का संतुलन विद्यालयों के पक्ष में है।
अदालत ने आदेश दिया, "तदनुसार, यह निर्देश दिया जाता है कि वर्तमान याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, अधिसूचना के खंड 3(1) और (2) का संचालन और क्रियान्वयन स्थगित रहेगा और याचिकाकर्ता अधिनियम और नियमों के प्रावधानों के अनुसार फीस निर्धारित या अनुमोदित होने तक शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए वही फीस वसूलने के हकदार होंगे जो पिछले शैक्षणिक वर्ष के लिए वसूली गई थी, इन याचिकाओं के परिणाम के अधीन।''
एक फरवरी को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के क्रियान्वयन को "सुचारू" बनाने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके नये फीस निर्धारण कानून को लेकर सवाल उठाने के बाद जारी की थी।
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को आदेश के प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर एक विद्यालय-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने का निर्देश दिया गया था।
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत
2802 1949 दिल्ली