मार्च- मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में रह सकता लू का कहर : आईएमडी
पवनेश
- 28 Feb 2026, 09:26 PM
- Updated: 09:26 PM
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) इस साल मार्च से मई महीने के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में लू से प्रभावित दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को अपने मासिक पूर्वानुमान में यह जानकारी दी।
आईएमडी के मुताबिक इन क्षेत्रों में पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल में गंगा के मैदान, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं।
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया, ''मार्च-अप्रैल-मई के दौरान सामान्य से अधिक दिनों तक लू के प्रकोप की आशंका सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल संसाधनों, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा कर सकती है, विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए।''
हालांकि, मार्च के दौरान, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के कुछ हिस्सों और मध्य और प्रायद्वीपीय भारत को छोड़कर, देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।
इस बीच, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, दक्षिणी प्रायद्वीप और पूर्वी तट के कुछ हिस्सों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रहने की संभावना है, जहां मार्च के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ''ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि मार्च 2026 के दौरान भारत में औसत वर्षा सामान्य रहने की संभावना है। 1971 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर, मार्च के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत वर्षा (एलपीए)लगभग 29.9 मिमी है।''
आईएमडी के मुताबिक देश के कई हिस्सों में मार्च में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है जबकि उत्तरपूर्वी भारत और उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी-मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में कमजोर ला नीना (समुद्री धारा) की स्थिति बनी हुई है। लेकिन वैश्विक मॉडलों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मानसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (एमएमसीएफएस) के पूर्वानुमानों के अनुसार, आने वाले महीनों में तटस्थ अल नीनो दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की स्थिति फिर से लौट सकती है।
आईएमडी ने फरवरी के दौरान मौसम की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा भारत में इस वर्ष फरवरी में वर्ष 2001 के बाद सबसे कम बारिश दर्ज की गई।
इसके मुताबिक, ''फरवरी माह में पूरे भारत में कहीं शीत लहर नहीं चली, दिन का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया।
मौसम विज्ञान विभाग ने कहा, ''किसी भी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति और पूर्वी हवाओं के साथ उनके अंतर्संबंध/संलग्नता की कमी इस महीने कम बर्फबारी/वर्षा के प्रमुख कारण हैं।''
आईएमडी ने बताया कि दक्षिण प्रायद्वीप और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहा।
पूर्वी प्रायद्वीप और पूर्वी-मध्य भारत को छोड़कर भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहा।
आईएमडी ने कहा, ''भारत में 1901 के बाद से अबतक के फरवरी के आंकड़ों के मुताबिक 2026 का अधिकतम तापमान में 10वां स्थान, न्यूनतम तापमान में तीसरा स्थान और औसत तापमान में पांचवां स्थान रहा।''
भाषा धीरज पवनेश
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