माओवादियों के पूर्व नेता रूपेश समेत 120 पूर्व माओवादी छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे
सिम्मी
- 27 Feb 2026, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
रायपुर, 27 फरवरी (भाषा) आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व माओवादी नेता रूपेश समेत 120 पूर्व माओवादी शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि कार्यवाही देखने पहुंचे पूर्व माओवादियों के दल में पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) रूपेश उर्फ सतीश, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के पांच पूर्व सदस्य, सात पूर्व डिविजनल कमेटी सदस्य, 33 पूर्व एरिया कमेटी सदस्य और माओवादियों के 84 पूर्व पार्टी सदस्य शामिल रहे।
उन्होंने बताया कि दल में 54 महिलाएं शामिल थीं।
दल ने विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य मंत्रियों से मुलाकात की। उन्होंने सदन की कार्यवाही भी देखी।
साय ने पारंपरिक 'जय जोहार' के नारे के साथ उनका स्वागत किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुर्नवासित लोगों को सम्मानजनक रोज़गार दिलाने में मदद करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, ''हमने अपनी पुर्नवास नीति उसी हिसाब से बनाई है। नतीजा यह है कि जो लोग कभी हिंसा के रास्ते पर चलते थे, वे अब संविधान के मंदिर में हमारे साथ खड़े हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को देख रहे हैं।''
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने ''बंदूक'' का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं की तारीफ़ की।
उन्होंने कहा, ''संविधान का रास्ता विकास, शांति और खुशहाली का रास्ता है। राज्य सरकार पुर्नवासित युवाओं के लिए सम्मानजनक ज़िंदगी, रोज़गार और कौशल विकास के मौके सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है।''
शर्मा ने भरोसा जताया कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनेंगे और दूसरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग लंबे समय से बदलाव चाहते थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में यह अब पूरा हो रहा है।
विधानसभा में आसंदी ने इस मौके को खास एवं ऐतिहासिक बताया और पूर्व माओवादियों का स्वागत किया तथा उन्हें लोकतांत्रित मुख्यधारा में वापस आने और भारत का संविधान मानने के लिए बधाई दी।
जब रूपेश से पूछा गया कि क्या वह चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने कहा कि यह ज़रूरी नहीं है कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर कोई चुनावी राजनीति में आए। रूपेश ने पिछले साल अक्टूबर में आत्मसमर्पण किया था।
उन्होंने कहा, ''हम लोगों के बीच रहेंगे और उनके साथ काम करेंगे।''
रूपेश ने कहा कि वह पहले से ही विधानसभा की कार्यवाही से वाकिफ हैं और जल्दबाज़ी में कोई बात नहीं कहना चाहते हैं।
डीकेएसजेडसी की पुरानी सदस्य सुखमती ध्रुव उर्फ रानीता 1998 में माओवादी आंदोलन में शामिल हुई थीं और उन्होंने रूपेश के साथ आत्मसमर्पण किया था। रानीता ने कहा कि बदलते हालात ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए हिम्मत दी।
उन्होंने कहा कि पहली बार रायपुर और विधानसभा भवन जाना एक प्रेरणा देने वाला अनुभव था।
भाषा संजीव सिम्मी
सिम्मी
2702 2121 रायपुर