डेटा सेंटर क्लस्टर से मजबूत होगा डिजिटल शासन, बढ़ेगी पारदर्शिता: योगी आदित्यनाथ
खारी
- 20 Feb 2026, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
लखनऊ, 20 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि 'डेटा सेंटर क्लस्टर' से डिजिटल शासन मॉडल मजबूत होगा और सुरक्षित डेटा संग्रहण, डेटा संसाधन व प्रबंधन से शासन की दक्षता तथा पारदर्शिता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि बजट में डेटा सेंटर की स्थापना और 'स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी' के गठन को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में डेटा नयी अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन चुका है और कृत्रिम मेधा (एआई) आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है, ऐसे में डेटा की उपयोगिता और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन को समझना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एक समय दुनिया में ''तेल आधारित अर्थव्यवस्था'' की अवधारणा प्रमुख थी, यानी जिसके पास तेल संसाधन थे वही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभावी था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद उभरती प्रौद्योगिकियों ने महत्व प्राप्त किया और जिन देशों ने इन पर एकाधिकार स्थापित किया, उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया यह स्वीकार कर रही है कि एआई भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति बनने जा रही है और इसके लिए सबसे पहली आवश्यकता सशक्त डेटा संरचना की है, इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार ने डेटा सेंटर की स्थापना और डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का कार्यक्रम आगे बढ़ाया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर नहीं थे, लेकिन उसके बाद सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए और अब प्रदेश में कई डेटा सेंटर स्थापित हो चुके हैं और कई प्रस्तावित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन डेटा सेंटरों को क्लस्टर के रूप में विकसित कर उन्हें अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्याओं के उत्पन्न होने के बाद समाधान खोजने के बजाय डेटा विश्लेषण के आधार पर पहले से संभावित चुनौतियों का आकलन कर रणनीति तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि 'स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी' को प्रदेश का शीर्ष नियामक और रचनाकार के रूप में विकसित किया जाएगा। यह प्राधिकरण विभिन्न विभागों से डेटा एकत्रित कर उसे एकीकृत करेगी, उसका विश्लेषण करेगी और नीति निर्माण में उसका उपयोग सुनिश्चित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में 'इंसेफेलाइटिस' की चपेट में आने वाले बच्चों को न तो पर्याप्त इलाज मिल पाता था और न ही इसके उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा, ''2017 में जब हम सत्ता में आए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि बीमारी के उपचार के लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और अस्पतालों को सुदृढ़ किया जाए। इसके साथ ही बीमारी के उन्मूलन पर प्रभावी कार्य किए गए।''
उन्होंने कहा कि डेटा विश्लेषण के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि 'इंसेफेलाइटिस' से अधिक मौतें उन क्षेत्रों में हो रही थीं जहां शुद्ध पेयजल का अभाव था और लोग खुले में शौच के लिए मजबूर थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''पहले हर वर्ष 1200 से 1500 बच्चों की मौत केवल इंसेफेलाइटिस से होती थी। हमने सभी उपलब्ध आंकड़ों को एक साथ संकलित किया, विभिन्न विभागों को समन्वित किया और लक्षित कार्रवाई शुरू की। इसका परिणाम यह हुआ कि 2019 के बाद 'इंसेफेलाइटिस' के उन्मूलन की स्थिति बन गई और आज यह बीमारी प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन को किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए और कानून की नजर में सरकार की योजनाओं का लाभ सभी को समान रूप से मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक बिना जाति, वर्ग या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किए योजनाओं का लाभ पहुंचाए।
भाषा आनन्द खारी
खारी
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