तृणमूल ने एसआईआर में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के न्यायालय के फैसले का स्वागत किया
वैभव
- 20 Feb 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
कोलकाता, 20 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'जनता की बड़ी जीत' करार दिया। वहीं, राज्य में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल सरकार पर जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप पर खेद जताते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नये निर्देश जारी किये।
पीठ ने तार्किक विसंगति सूची में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया।
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि इससे एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं के उसके आरोपों की पुष्टि हुई है।
पार्टी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से जारी पोस्ट में कहा, ''बंगाल की जनता के लिए एक बड़ी जीत! आज निर्वाचन आयोग के अहंकार का ऐतिहासिक रूप से पर्दाफाश हुआ है।''
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पर्यवेक्षक ''वैध दावों को नजरअंदाज कर रहे थे और वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे थे''। उसने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश देकर 'करारा जवाब' दिया है कि सभी दावों, आपत्तियों और विसंगति के मामलों को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से प्रतिनियुक्त निष्पक्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा निपटाया जाए।
राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा, ''यह निर्वाचन आयोग के लिए एक बड़ा झटका है जिसने अपने पवित्र संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन किया है।''
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस गतिरोध के लिए ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार 'जमीनी स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है' और एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा,''राज्य प्रशासन ही इस प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है और लोगों को गुमराह कर रहा है। निर्वाचन आयोग केवल मतदाता सूची का निष्पक्ष और स्वतंत्र पुनरीक्षण सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन राज्य प्रशासन शुरू से ही निर्वाचन आयोग के साथ असहयोग कर रहा है।''
भाषा धीरज वैभव
वैभव
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