योग शिविर के लिए शुल्क: न्यायालय ने पतंजलि ट्रस्ट की सुधारात्मक याचिका खारिज की
माधव
- 19 Feb 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की सुधारात्मक याचिका को खारिज कर दिया और न्यायाधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया था कि आवासीय और गैर-आवासीय दोनों प्रकार के योग शिविरों के आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क लेने पर ट्रस्ट को सेवा कर का भुगतान करना होगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सुधारात्मक याचिका पर विचार करते हुए इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें कोई मामला नहीं बनता है।
पीठ ने चार फरवरी को यह आदेश दिया जिसे बृहस्पतिवार को अपलोड किया गया।
पीठ ने कहा, ''हमने सुधारात्मक याचिका और संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन कर लिया है। हमारी राय में, रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा और अन्य (2002) के मामले में इस न्यायालय द्वारा इंगित मापदंडों के भीतर सुधारात्मक याचिका पर विचार करने का कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए सुधारात्मक याचिका खारिज की जाती है।''
इसने खुली अदालत में सुनवाई के लिए ट्रस्ट के आवेदन को भी खारिज कर दिया।
ट्रस्ट ने न्यायमूर्ति अभय एस ओका (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) और न्यायमूर्ति भुइयां की पीठ द्वारा पुनर्विचार याचिका को खारिज किए जाने को चुनौती दी है।
पिछले साल सात जनवरी को, न्यायमूर्ति ओका की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्चतम न्यायालय के 19 अप्रैल, 2024 के उस आदेश की समीक्षा का अनुरोध संबंधी याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें ट्रस्ट को कोई राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने 19 अप्रैल, 2024 को एक अपीलीय न्यायाधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें कहा गया था कि आवासीय और गैर-आवासीय दोनों प्रकार के योग शिविरों के आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क वसूलने पर ट्रस्ट सेवा कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।
पीठ ने सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) की इलाहाबाद पीठ के पांच अक्टूबर, 2023 को आए फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने ट्रस्ट की अपील खारिज करते हुए कहा था, ''न्यायाधिकरण ने ठीक ही कहा है कि शुल्क वाले शिविरों में योग करना एक सेवा है। हमें इस आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला। अपील खारिज की जाती है।''
सीईएसटीएटी ने अपने आदेश में कहा था कि पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की तरफ से आयोजित आवासीय एवं गैर-आवासीय योग शिविरों में शामिल होने के लिए शुल्क लिया जाता है लिहाजा यह ''स्वास्थ्य और फिटनेस सेवा'' की श्रेणी में आता है और इस पर सेवा कर लगेगा।
योग गुरु रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के अधीन काम करने वाला यह ट्रस्ट विभिन्न शिविरों में योग प्रशिक्षण प्रदान करने में लगा हुआ था।
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा था कि प्रतिभागियों से दान के रूप में योग शिविरों के लिए शुल्क एकत्र किया गया था। हालांकि यह राशि दान के रूप में एकत्र की गई थी, लेकिन यह उक्त सेवाएं प्रदान करने के लिए शुल्क ही था। इसलिए यह शुल्क की परिभाषा के तहत आता है।
सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, मेरठ रेंज के आयुक्त ने अक्टूबर, 2006 से मार्च, 2011 के लिए जुर्माना और ब्याज समेत लगभग 4.5 करोड़ रुपये के सेवा कर की मांग की थी।
इसके जवाब में ट्रस्ट ने दलील दी थी कि वह ऐसी सेवाएं प्रदान कर रहा है जो बीमारियों के इलाज के लिए हैं। इसमें कहा गया था कि ये सेवाएं 'स्वास्थ्य और फिटनेस सेवा' के तहत कर-योग्य नहीं हैं।
भाषा
देवेंद्र माधव
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