मप्र: नेता प्रतिपक्ष पर विजयवर्गीय की टिप्पणी को लेकर विधानसभा में बवाल, मुख्यमंत्री ने मांगी माफी
खारी
- 19 Feb 2026, 11:36 PM
- Updated: 11:36 PM
भोपाल, 19 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा में बृहस्पतिवार को संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी को लेकर विवाद हो गया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने अफसोस जताया और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने माफी मांगी।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल जिससे हंगामा खड़ा हो गया।
दरअसल, चर्चा में हिस्सा लेते हुए सिंघार ने सिंगरौली में सरकार और अदाणी के बीच हुए करार का मुद्दा उठाया और दावा किया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर 25 साल में अदाणी की कंपनी को एक से सवा लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी में है।
इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई और कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए जबकि विजयवर्गीय ने सिंघार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।
सिंघार ने कहा कि वह हर बात प्रमाण के साथ करते हैं और जरूरत पड़ने पर प्रमाण दे सकते हैं।
इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और इसी दौरान विजयवर्गीय ने सिंघार के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर दिया।
इसके बाद, विपक्षी कांग्रेस के सदस्य हंगामा करते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करने लगे। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से हंगामा और नारेबाजी की गई।
हंगामा बढ़ता देख तोमर ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी।
बाद में जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा की एक गौरवशाली परंपरा रही है लेकिन आज असहज स्थिति बन गई, जिसका कि उन्हें अफसोस है।
तोमर ने कहा, ''गुस्सा आना नहीं चाहिए लेकिन आज आ गया, दोनों पक्षों की तरफ से। उसके कारण असहज स्थिति बनी। मुझे इसका रंज है इसके लिए पक्ष और प्रतिपक्ष जिम्मेदार हैं।''
उन्होंने कहा, ''संसदीय कार्य मंत्री बहुत अनुभवी हैं फिर भी आज सीमा कैसे टूट गई यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है।''
इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से विवाद का पटाक्षेप करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जाने-अनजाने में कुछ शब्द निकले हैं, इसके लिए वह सदन से माफी मांगते हैं।
सिंघार ने कहा मुख्यमंत्री ने जो भाव दिखाया, वह उसका सम्मान करते हैं और संसदीय मर्यादा का ध्यान रखते हैं।
उन्होंने कहा, ''अगर मेरी ओर से कुछ हुआ है तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं।''
इस बीच, विजयवर्गीय ने कहा कि करीब 37 साल का उनका राजनीतिक अनुभव रहा है लेकिन आज के अपने व्यवहार से वह खुश नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अगर संसदीय मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो बाकी सदस्य कैसे करेंगे।
उन्होंने कहा कि आज पता नहीं कैसे यह सब हो गया।
विजयवर्गीय ने कहा, ''उमंग के हाव-भाव थोड़े अलग थे... मैं उमंग को प्यार करता हूं... मैं अपने व्यवहार से दुखी हूं।''
बाद में सिंघार ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में विजयवर्गीय पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हमेशा अपनी हद में रहते हैं।
उन्होंने कहा, ''मेरी औकात मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता के सवालों को आपकी अहंकारी सत्ता के सामने मुखरता से रखने की है। मेरी इसी औकात ने आपको इतना बौना बना दिया कि आपके अंदर का असली चेहरा बाहर आ गया, मेरी इसी औकात ने आपको भगीरथपुरा पर बहस करने पर मजबूर किया।''
उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्द केवल उमंग सिंघार या किसी एक नेता प्रतिपक्ष के लिए नहीं थे, यह मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता का अपमान है।
उन्होंने कहा, ''जनता को कीड़े-मकोड़े समझने की मानसिकता रखने वाले मंत्री विजयवर्गीय ने असल में अपने अहंकार का परिचय दिया है...।''
उन्होंने कहा, ''सत्ता का मद इतना चढ़ गया है कि जनप्रतिनिधि खुद को जनता से ऊपर समझने लगे हैं।''
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के व्यवहार को सत्ता के अहंकार की पराकाष्ठा करार दिया और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'नए भारत' का नया परिचय है।
उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस विजयवर्गीय के पुतले जलाकर इसका विरोध करेगी।
पटवारी की इस घोषणा के कुछ ही देर बाद राजधानी भोपाल में युवक कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने विजयवर्गीय के आवास के बाहर उनका एक पोस्टर जलाया।
भाषा ब्रजेन्द्र खारी
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