प्रियंका ने असम सरकार के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस का 'आरोपपत्र' जारी किया, भाजपा ने इसे सरासर झूठ बताया
वैभव
- 19 Feb 2026, 10:01 PM
- Updated: 10:01 PM
(तस्वीरों के साथ)
गुवाहाटी, 19 फरवरी (भाषा) कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने बृहस्पतिवार को गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली असम सरकार के खिलाफ 20 सूत्री 'आरोपपत्र' जारी किया, जिसमें राज्य प्रशासन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
भाजपा के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों को 'सरासर झूठ और निराधार' बताकर खारिज कर दिया।
विपक्षी पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले यह 'आरोपपत्र' जारी किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक दशक के शासनकाल के बावजूद भाजपा सरकार छह आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने और चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 351 रुपये करने के अपने वादे को पूरे करने में विफल रही।
कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा सरकार 'बुलडोजर न्याय और अल्पसंख्यकों के चुनिंदा निष्कासन' में लिप्त है।
असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदवार चयन समिति की अध्यक्ष वाद्रा दो दिवसीय असम दौरे पर हैं। उनके साथ लोकसभा सांसद इमरान मसूद और सप्तगिरि शंकर उलका तथा समिति के सदस्य सिरिवेल्ला प्रसाद भी हैं।
इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे, जिनमें असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई, असम के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और झारखंड के पूर्व विधायक बंधु टिर्की शामिल हैं।
दस्तावेज जारी होने से पहले गोगोई ने कहा, ''यह आरोपपत्र उन मुद्दों पर आधारित है जो जनता ने हमारे सामने तब उठाए थे, जब हमारे नेताओं और सदस्यों ने इसे तैयार करने के लिए उनसे संपर्क किया था।''
उन्होंने पार्टी के प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे ''इनमें से प्रत्येक मुद्दे को हर घर तक पहुंचाएं।'' शीर्ष नेताओं ने 'आरोपपत्र' जारी होने के तुरंत बाद बूथ अध्यक्षों और अन्य लोगों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की।
लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, जो घोषणापत्र समिति के प्रमुख हैं और 'आरोपपत्र' तैयार करने के प्रभारी थे, ने कहा कि इसे तीन महीने की अवधि में जनता के साथ परामर्श के आधार पर संकलित किया गया है।
कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह 'व्यापक भ्रष्टाचार' में लिप्त है। पार्टी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनके करीबी मंत्रियों एव उनके परिवार के सदस्यों पर 'अवैध रूप से संपत्ति जमा करने' का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने सरकार पर गैर-जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन, 'सिंडिकेट राज' को संस्थागत रूप देने और समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस ने भाजपा पर पुलिस मुठभेड़ों और 'मनमाने' तरीके से न्याय करने जैसे कठोर उपायों के माध्यम से भय पैदा करके संवैधानिक शासन के प्रति छल-कपट करने का आरोप लगाया।
'आरोपपत्र' में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार नए रोजगार सृजित करने में असमर्थ रही और असम को 'श्रम आपूर्ति राज्य' में बदल दिया, सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को कुचल दिया, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और महिलाओं और बच्चों को हिंसा से बचाने में विफल रही, मादक प्रदार्थों का प्रसार हुआ और शहरी नियोजन का अभाव रहा।
इस बीच, असम भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता रूपम गोस्वामी ने दावा किया कि 'अरोपपत्र' सरासर झूठ है और यह पूरी तरह निराधार है।
गोस्वामी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''दस्तावेज के शीर्षक को देखें तो यह मूल रूप से किसी एक व्यक्ति को निशाना बना रहा है, न कि पार्टी को।''
बारह पन्नों के 'आरोपपत्र' का शीर्षक है ''असम की जनता बनाम हिमंत विश्व शर्मा की भाजपा सरकार (2021-2026)''।
गोस्वामी ने कांग्रेस पर उसके कार्यकाल के दौरान 'सिंडिकेट' चलाने का आरोप लगाया, जिसके कारण उसे सत्ता गंवानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य भर में शांति सुनिश्चित की है, गैंडों के अवैध शिकार पर रोक लगाई है, बाढ़ और भूस्खलन की समस्याओं को नियंत्रित किया है और सरकारी नौकरियों में पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित की है।
उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल और असम आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने ही मीडिया को 'नियंत्रित' करने की कोशिश की थी, जबकि वर्तमान सरकार ने प्रेस को पूरी छूट दी है।
भाषा संतोष संतोष वैभव
वैभव
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