दिल्ली के तीन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी जांच में फर्जी निकली
वैभव
- 19 Feb 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली के कम से कम तीन स्कूलों को बृहस्पतिवार सुबह ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसके बाद आपातकालीन एजेंसियों ने तत्काल वहां से बच्चों को बाहर निकाला और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि बाद में इन धमकियों को फर्जी करार दे दिया गया।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के एक अधिकारी ने कहा, "हमें तीन स्कूलों-द्वारका स्थित सीआरपीएफ पब्लिक स्कूल और सेंट थॉमस स्कूल, तथा पश्चिम एनक्लेव स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल-को बम की धमकी वाले ईमेल भेजे जाने की सूचना मिली थी। एहतियात के तौर पर दमकल की गाड़ियों और बचाव दलों को तुरंत इन स्थानों पर भेजा गया। तलाशी के दौरान कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।"
अधिकारियों ने बताया कि अलर्ट मिलने के तुरंत बाद पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ता, श्वान दस्ता और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को स्कूलों में भेजा गया।
एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल प्रशासनों ने तलाशी अभियान के दौरान छात्रों और कर्मचारियों को परिसर से बाहर निकाला।
अधिकारियों ने कहा कि पूरी जांच और तलाशी के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे परिसर में गहन जांच की गई।
पुलिस ने बताया कि साइबर टीम को सतर्क कर दिया गया है और ईमेल कहां से भेजा गया था, इसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "ईमेल की जांच की जा रही है ताकि उनके स्रोत और प्रामाणिकता का पता लगाया जा सके। हम यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या अन्य संस्थानों को भी इसी तरह की धमकियां भेजी गई थीं।"
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 13 फरवरी को भी दिल्ली के कम से कम सात स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले थे, जिन्हें बाद में फर्जी घोषित किया गया था।
धमकी भरे ईमेल में परेशान करने वाली और भड़काऊ बातें लिखी गई थीं, जिसमें दावा किया गया था कि "दिल्ली खालिस्तान बन जाएगी और स्कूलों में बम विस्फोट होंगे।"
ईमेल में यह भी दावा किया गया था कि संसद के अंदर भी विस्फोट होगा, जिसके बाद सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया और कई एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया।
कई अभिभावकों ने बताया कि वे अपने कार्यस्थल पर पहुंचे ही थे कि उनके फोन पर स्कूल प्रशासन के संदेश आने लगे, जिसमें उनसे तुरंत अपने बच्चों को ले जाने के लिए कहा गया।
पांचवीं कक्षा की एक छात्रा के पिता ने कहा, "मैं अपनी बेटी को स्कूल के गेट पर छोड़कर घर लौटा ही था कि मुझे बम की धमकी के बारे में संदेश मिला।"
उन्होंने बताया कि वे कुछ ही मिनटों में वापस स्कूल की ओर दौड़े।
एक अन्य अभिभावक ने कहा, "हम अपने बच्चों को इस भरोसे के साथ स्कूल छोड़ते हैं कि वे सुरक्षित हैं। जैसे ही उन्हें वापस ले जाने का संदेश आया, वह स्थिति बहुत डरावनी थी। भले ही यह फर्जी धमकी निकली, लेकिन डर बहुत वास्तविक होता है।"
इन स्कूलों में से एक के बाहर, अभिभावक घबराकर फोन करते देखे गए, जबकि पुलिसकर्मी परिसर के भीतर जांच कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, इन ईमेल को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) और प्रॉक्सी सर्वर के एक जटिल जाल के माध्यम से भेजा गया था, जिससे उनके मूल स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि संदेश भेजने वाले अक्सर कई देशों के सर्वर बदलकर और वीपीएन कनेक्शन की कई परतों का उपयोग करके अपनी स्थिति को छुपाते हैं।
अधिकारी ने कहा कि ये ईमेल आमतौर पर एन्क्रिप्टेड (सुरक्षित) सेवाओं के जरिए भेजे जाते हैं और कई विदेशी सर्वरों से होकर गुजरते हैं। जब तक हम इनकी जांच शुरू करते हैं, तब तक इनका डिजिटल सुराग कई बार बदला और छिपाया जा चुका होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी तरकीबों से पहचान करने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है और जांच अधिकारियों को सेवा प्रदाताओं से तकनीकी मदद लेनी पड़ती है और कई मामलों में आईपी एड्रेस से जुड़े उपयोगकर्ता की जानकारी पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी संपर्क करना पड़ता है।
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