छियासठ प्र.श. से अधिक ने माना एआई शिक्षा प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े जोखिमों को बढ़ाता है:रिपोर्ट
सुरेश
- 19 Feb 2026, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) देश के 10 राज्यों में 66 प्रतिशत से अधिक माता-पिता एवं शिक्षकों का कहना है कि जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआई) का उपयोग सीखने के लिए किया जा सकता है, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि कृत्रिम मेधा (एआई) शिक्षा प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े जोखिमों को बढ़ाती है।
इनमें प्रौद्योगिकी का अत्यधिक इस्तेमाल और गलत जानकारी जैसे जोखिम शामिल हैं। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जेनएआई अर्थात सृजनात्मक कृत्रिम मेधा का उपयोग करने वाले 96 प्रतिशत बच्चे इसे स्कूल से जुड़े अध्ययन के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से 59 प्रतिशत इसे केवल स्कूल-कार्य के वास्ते ही इस्तेमाल करते हैं।
यह रिपोर्ट यहां 'इम्पैक्ट एआई समिट' के दौरान जारी की गई। सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (सीएसएफ) द्वारा किया गया भारत सर्वे फॉर एडटेक (बेस) 2025, अपनी तरह के पहले बड़े पैमाने के राष्ट्रीय सर्वेक्षण का दूसरा संस्करण है।
यह सर्वेक्षण भारत में कम आय वाले परिवारों के बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी की पहुंच और उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
प्रस्तुत निष्कर्ष भारत के 10 राज्यों के परिवारों से चुने गए 12,500 बच्चों से प्राप्त किए गए हैं।
सर्वेक्षण के लिए उन्हीं राज्यों के विद्यालयों से 2,500 से अधिक शिक्षकों को चुना गया, जहां घरेलू सर्वेक्षण किया गया था।
सर्वेक्षण किए गए 56 प्रतिशत परिवारों में माताएं उत्तरदाता थीं और 37 प्रतिशत में पिता प्राथमिक उत्तरदाता थे।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, "जेनएआई का उपयोग करने वाले 67 प्रतिशत बच्चों को इसके बारे में उनके साथियों से जानकारी मिली, जबकि 46 प्रतिशत ने इसके बारे में स्कूल या शिक्षकों से सुना। इसके प्रमुख कारणों में गोपनीय और आसानी से समझ में आने वाली व्याख्याएं (45 प्रतिशत), समय बचाने वाले त्वरित उत्तर (41 प्रतिशत) और उपकरणों की आसानी से समझ में आने वाली प्रकृति (40 प्रतिशत) शामिल हैं।"
रिपोर्ट में बताया गया कि जेनएआई का उपयोग करने वाले 96 प्रतिशत बच्चों ने इसका इस्तेमाल स्कूल से जुड़े अध्ययन के लिए किया, जिनमें से 59 प्रतिशत ने इसका उपयोग केवल स्कूल के काम के लिए किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ''चौरासी प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जेनएआई के उपयोग से सीखने में सुधार की जानकारी दी। जेनएआई का उपयोग सीखने के लिए किया जा सकता है, यह जानने वाले 66 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि एआई, शिक्षा प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े जोखिमों को बढ़ा देता है, जिनमें प्रौद्योगिकी का अत्यधिक उपयोग (77 प्रतिशत) और गलत जानकारी (47 प्रतिशत) जैसे जोखिम शामिल हैं।''
सर्वेक्षण के मुताबिक, 81 प्रतिशत बच्चे इस बात से अवगत हैं कि प्रौद्योगिकी का उपयोग सीखने के लिए किया जा सकता है हालांकि, ग्रामीण बच्चे और छोटे बच्चे शिक्षा प्रौद्योगिकी के बारे में कम जागरूक हैं।
रिपोर्ट में पाया गया कि ग्रामीण बच्चों में से 75 प्रतिशत जागरूक हैं, जबकि शहरी बच्चों में यह आंकड़ा 87 प्रतिशत है।
सर्वेक्षण में बताया गया, "पहली से पांचवीं कक्षा तक के 68 प्रतिशत बच्चे शिक्षा प्रौद्योगिकी से अवगत हैं, जबकि छठी से आठवीं कक्षा तक के 86 प्रतिशत और नौवीं से 12वीं कक्षा तक के 94 प्रतिशत बच्चे इससे अवगत हैं। तिरसठ प्रतिशत बच्चे सीखने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं। केवल पांच प्रतिशत बच्चों ने पहले इसका उपयोग किया, फिर इसे बंद कर दिया और 14 प्रतिशत बच्चे शिक्षा प्रौद्योगिकी से अवगत तो हैं, लेकिन उन्होंने इसका कभी उपयोग नहीं किया है।"
जागरूकता के बावजूद उपयोग न करने के प्रमुख कारणों में प्रौद्योगिकी एवं उपकरणों के चयन, इस्तेमाल की जानकारी की कमी (45 प्रतिशत) और उपकरण या इंटरनेट से संबंधित समस्याएं (40 प्रतिशत) शामिल हैं।
भाषा जितेंद्र सुरेश
सुरेश
1902 1909 दिल्ली