असम में एसआर का मकसद पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना व अपात्र को बाहर करना : ज्ञानेश कुमार
अविनाश
- 18 Feb 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
गुवाहाटी, 18 फरवरी (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि असम में विशेष पुनरीक्षण (एसआर) का एकमात्र मकसद पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र मतदाताओं को सूची से बाहर करना था।
राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय दौरे के समापन पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कुमार ने कहा कि असम में एसआर इसलिए कराया गया क्योंकि यह देश का एकमात्र राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा, "कानून के अनुसार चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण अनिवार्य है। इसी के तहत 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया, जबकि असम में विशेष पुनरीक्षण किया गया।"
कुमार ने बताया कि असम में यह प्रक्रिया सफल रही और पूरे राज्य के विभिन्न जिलों से केवल 500 लोगों ने अपने नाम शामिल करने या किसी अन्य का नाम हटाने के लिए अपील दायर की।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने के दिन 2.52 करोड़ मतदाता थे और अंतिम मतदाता सूची में 2.49 करोड़ मतदाता हैं। यह मतदाताओं, विशेष रूप से बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा किए गए अथक परिश्रम को दर्शाता है।
कुमार ने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है, तो वह फॉर्म 6 के माध्यम से आवेदन जमा कर सकता है या सीधे जिला आयुक्त से अपील कर सकता है।
अवैध विदेशियों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के सवाल पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि बीएलओ ने यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत मेहनत की कि सही सूची तैयार की जाए।
बिहू पर्व से पहले चुनाव कराए जाने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि बिहू असम का महत्वपूर्ण त्योहार है और समीक्षा बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से प्राप्त सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही चुनाव तिथियों पर निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निर्णय मतदाताओं के हित में लिए जाएंगे।
उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे 'लोकतंत्र के त्योहार' को उसी तरह मनाएं जैसे वे बिहू पर्व मनाते हैं।
कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने सुचारू रूप से चुनाव कराने के लिए कई पहल की हैं, जिनमें राज्यों के सभी 31,486 मतदान केंद्रों पर 'वेबकास्टिंग' शामिल है।
राज्य में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, जबकि 2586 मतदाताओं की आयु 100 साल से अधिक है। 66 लाख युवा और 5.75 लाख नए मतदाता शामिल किए गए हैं।
कुमार ने बताया कि अन्य पहल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मतदान को आसान बनाना शामिल है, जिनके लिए भूतल पर मतदान केंद्र सुनिश्चित किए जाएंगे और घर से मतदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे।
कुमार ने बताया कि असम में मतदाताओं के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, वे अपने मोबाइल फोन मतदान केंद्र के दरवाजे तक ले जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में पहली बार ईवीएम और बूथ के बाहर लगी सूची में उम्मीदवारों की तस्वीरें रंगीन होंगी ताकि मतदाता उन्हें आसानी से पहचान सकें।
कुमार ने राज्य में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी निष्पक्षता से काम करने और राजनीतिक दलों की शिकायतों और समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बिना किसी डर या पक्षपात के कानून का सख्ती से पालन करने का भी आग्रह किया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने संवाददाता सम्मेलन से पहले एसआर प्रक्रिया के दौरान अनुकरणीय कार्य करने वाले 100 बीएलओ को सम्मानित किया और 'पैरासाइक्लिस्ट' रमेश बनिक को राज्य की हस्ती के रूप में सम्मानित किया। बनिक ने पिछले विधानसभा और संसदीय चुनावों के दौरान मतदाता जागरूकता के लिए 2000 किलोमीटर की यात्रा की थी।
कुमार ने दो नए मतदाताओं को मतदाना पहचान पत्र भी प्रदान किए।
इससे पहले दिन में, आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों और नोडल अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य पुलिस नोडल अधिकारी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ-साथ राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए असम दौरे पर आयी थी। उनके साथ निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी थे।
भाषा राखी अविनाश
अविनाश
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