दिल्ली की अदालत ने धन शोधन मामले में जेपी इंफ्रा के पूर्व प्रबंध निदेशक की जमानत याचिका खारिज की
पवनेश
- 17 Feb 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने धन शोधन के मामले में जेपी इंफ्राटेक के पूर्व प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ की जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने यह उल्लेख किया कि आरोपी पर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप है, जिसमें कई लोग शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि जहां हजारों घर खरीदार, जिन्होंने अपने सपनों का घर पाने के लिए गाढ़ी कमाई लगाई थी, दर-दर भटकते रहे, वहीं गौड़ अपराध से अर्जित धन से सुख सुविधाएं प्राप्त कर रहा था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा मामले में गौड़ की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घर खरीदारों के साथ 14,599 करोड़ रुपये की ''धोखाधड़ी'' से जुड़े मामले में पिछले साल 13 नवंबर को गिरफ्तार किया था।
संघीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और पूरा करने के लिए हजारों घर खरीदारों से एकत्र की गई धनराशि को निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई और उनकी परियोजनाएं अधूरी रह गईं।
एजेंसी का दावा है कि दो कंपनियों - जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) और जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) - ने क्रमशः नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आवासीय परियोजनाओं जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स के निर्माण के लिए 33,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की।
मंगलवार को उपलब्ध कराये गए 16 फरवरी के अपने आदेश में अदालत ने कहा, ''यह रिकॉर्ड में दर्ज है कि गौड़ के खिलाफ चार मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है और प्रथम दृष्टया वह अपराधों में संलिप्त पाया गया है।''
न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि आरोपी ने कोई अपराध नहीं किया है या भविष्य में और अपराध नहीं करेगा।
अदालत ने कहा कि गौड़ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित दोनों शर्तों को पूरा करने में भी विफल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि गौड़ के खिलाफ इसी तरह के आरोपों पर 11 प्राथमिकी दर्ज हैं और उसका अतीत दागदार है, इसलिए इस बात की प्रबल संभावना है कि जमानत पर रिहा होने पर वह इसी तरह के अपराध दोहरा सकता है।
उन्होंने कहा कि आरोपों के अनुसार, गौड़ के इशारे पर जेआईएल और जेएएल के खातों से क्रमशः 11,335 करोड़ रुपये और 2,498 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।
न्यायाधीश ने कहा, ''आरोपियों के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें हजारों करोड़ रुपये और हजारों निर्दोष घर खरीदार शामिल हैं। ऐसे मामले में जहां बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप हैं, अदालत को आरोपियों को नियमित जमानत पर रिहा करते समय सावधानी बरतनी होगी।''
भाषा सुभाष पवनेश
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