नीरज पांडे ने 'घूसखोर पंडत' का शीर्षक वापस लिया, न्यायालय ने याचिका का निपटारा किया
संतोष
- 19 Feb 2026, 03:33 PM
- Updated: 03:33 PM
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) फिल्म निर्माता नीरज पांडे द्वारा 'घूसखोर पंडत' शीर्षक एवं उससे जुड़ी सभी प्रचार सामग्री वापस लिए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने इस फिल्म के खिलाफ दायर याचिका का बृहस्पतिवार को निपटारा कर दिया।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पांडे के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने के बाद याचिका का निपटारा किया और उम्मीद जताई कि यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
यह याचिका 'ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया' के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने दायर की थी और इसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया गया था।
पांडे ने अपने हलफनामे में कहा कि मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म का नया शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन यह पहले वाले नाम से मिलता-जुलता नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ''मैं आदर पूर्वक अवगत कराता हूं कि पहले के शीर्षक 'घूसखोर पंडत' को स्पष्ट रूप से वापस ले लिया गया है और इसका किसी भी प्रकार से उपयोग नहीं किया जाएगा।
फिल्म निर्माता ने कहा, ''हालांकि नया शीर्षक अभी तय नहीं किया गया है, मैं यह आश्वासन देता हूं कि भविष्य में जो भी शीर्षक चयनित करके अपनाया जाएगा, वह उस पहले शीर्षक के समान या उससे मिलता-जुलता नहीं होगा, जिसके संबंध में आपत्तियां उठाई गई थीं। वह किसी अनपेक्षित व्याख्या को जन्म दिए बिना फिल्म की कहानी और आशय को सही ढंग से प्रतिबिंबित करेगा।''
उन्होंने कहा, ''मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह फिल्म एक सुधारवादी, काल्पना आधारित पुलिस ड्रामा है। मुख्य शूटिंग पूरी हो चुकी है और फिल्म अभी संपादन के चरण में है इसलिए फिल्म रिलीज नहीं हुई है। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि पहले शीर्षक के साथ जारी पोस्टर, ट्रेलर और अन्य प्रचार सामग्री इस याचिका के सूचीबद्ध होने से पहले ही वापस ले ली गई हैं।''
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान कहा, '' 'पंडत' शब्द से कोई आपत्ति नहीं थी, आपत्ति 'पंडत' के साथ 'घूसखोर' शब्द के इस्तेमाल से थी। हमें दूसरे शब्द से समस्या है, पहले शब्द से नहीं।''
पांडे के वकील ने कहा कि विवादित शीर्षक के तहत जारी किए गए सभी ट्रेलर, पोस्टर और प्रचार सामग्री हटा दी गई हैं।
उन्होंने कहा, ''मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि न तो मेरा और न ही मेरे 'प्रोडक्शन हाउस' का ऐसा कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा है कि हम भारत के किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाएं।''
पांडे ने कहा कि तीन फरवरी को फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद लोगों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने फिल्म से संबंधित प्रचार सामग्री छह फरवरी को हटा दी थी।
फिल्म के निर्माता ने कहा, ''मैं यह कहना चाहता हूं कि यह फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है जो एक आपराधिक जांच के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या संप्रदाय को भ्रष्ट के रूप में चित्रित नहीं करती है।''
उच्चतम न्यायालय ने 12 फरवरी को पांडे को उनकी फिल्म के शीर्षक को लेकर फटकार लगायी थी और कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष
1902 1533 दिल्ली