आयोग के आदेश के छह माह बाद ममता सरकार ने पांच निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की
माधव
- 17 Feb 2026, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
कोलकाता, 17 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने निर्वाचन आयोग के 'अल्टीमेटम' पर कार्रवाई करते हुए राज्य में विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची संशोधन को लेकर कथित "गंभीर चूक" और डेटा सुरक्षा नीतियों के उल्लंघन के आरोप में राज्य सरकार के पांच कर्मचारियों के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की।
इन कर्मचारियों में दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई आयोग द्वारा राज्य को आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले शुरू करने का निर्देश दिये जाने के छह महीने बाद की गई।
निर्वाचन आयोग द्वारा शाम पांच बजे की निर्धारित समयसीमा से महज कुछ ही घंटे पहले पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गईं।
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान के बीच हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार अपने सभी कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और इस कदम को "गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए"।
आरोपी कर्मियों पर दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र और पूर्वी मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूचियों में सौ से अधिक फर्जी नाम जोड़ने का आरोप है।
आयोग ने पिछले साल अगस्त में कथित पेशेवर कदाचार का पता चलने के बाद राज्य सरकार को पांचों अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इन पांच अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रवेश संकेत अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा किए, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़े जा सके और उन्होंने अनिवार्य कर्तव्यों का पालन नहीं किया।
इन अधिकारियों में देबोत्तम दत्ता चौधरी और तथागत मंडल (बरुईपुर पूर्व के ईआरओ और एईआरओ), बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास (मोयना के ईआरओ और एईआरओ) तथा सुरजीत हलदर (अस्थायी डाटा प्रविष्टि संचालक) शामिल हैं।
हालांकि, राज्य सरकार ने अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, लेकिन शुरुआत में उसने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। सरकार का कहना था कि ये कार्य 'अनजाने में हुई गलतियां' थीं।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का हवाला देते हुए आयोग ने राज्य के रुख को खारिज कर दिया, जनवरी में अनुस्मारक जारी किए और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए 17 फरवरी की समय सीमा निर्धारित की।
आयोग ने 13 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी के निर्वाचन सदन में बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से मुलाकात की और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य को एक नई समय सीमा दी।
बनर्जी ने आयोग को ''तुगलकी आयोग'' करार देते हुए मंगलवार को चुनाव निकाय द्वारा कर्तव्य में लापरवाही के आरोपी सभी अधिकारियों के साथ सरकार के खड़े रहने के रुख को दोहराया।
इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त जिला मतदाता सूची पर्यवेक्षकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद मंगलवार को तीन 'मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षकों' (ईआरएमओ) को भी निलंबित कर दिया गया।
सीईओ कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब यह सामने आया कि पर्यवेक्षक निर्धारित मानदंडों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे थे।
भाषा
सुरेश माधव
माधव
1702 2041 कोलकाता