नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़ेगी : शाह
रंजन
- 16 Feb 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि देश में आने वाले वर्षों में तीन नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की दर 80 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
दिल्ली पुलिस के 79वें स्थापना दिवस परेड समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने यह भी कहा कि माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में है और इस साल मार्च तक इस खतरे को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा।
शाह ने कहा कि न्याय पर आधारित तीन नए आपराधिक कानून पिछले 12 वर्षों में देश द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक हैं, जो आने वाले कुछ वर्षों में पूरी तरह से लागू होने के बाद मामलों के निपटारे और दोषसिद्धि की दर को बढ़ाने में मदद करेंगे।
गृह मंत्री तीन नए आपराधिक कानूनों - भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) का जिक्र कर रहे थे - जिन्होंने एक जुलाई, 2024 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और 'इंडियन एविडेंस एक्ट' (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) की जगह थी।
शाह ने कहा, "नई न्याय संहिता के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद, हमारी न्याय प्रणाली विश्व की सबसे आधुनिक प्रणाली बन जाएगी। इससे न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी कम होगी और दोषसिद्धि दर में भी वृद्धि होगी।"
उन्होंने कहा कि असम, गुजरात और हरियाणा जैसे कुछ राज्यों में दोषसिद्धि दर में "अभूतपूर्व वृद्धि" दर्ज की गई है।
गृह मंत्री ने कहा, "अगले दो वर्षों के भीतर, इन कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद, देश में दर्ज किसी भी प्राथमिकी पर तीन वर्षों में (निचली अदालत से लेकर) उच्चतम न्यायालय तक अंतिम निर्णय लिया जाएगा," और उन्होंने दावा किया कि दोषसिद्धि दर 80 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
तीनों आपराधिक कानूनों के बारे में विस्तार से बताते हुए शाह ने उल्लेख किया कि बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए एक अलग अध्याय जोड़ा गया है, और ई-प्राथमिकी और शून्य प्राथमनिकी को कानूनी मान्यता दी गई है।
गृह मंत्री ने कहा कि एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) के तहत पुलिस, न्यायपालिका, फोरेंसिक विज्ञान, अभियोजन पक्ष और जेलों को एकीकृत कर दिया गया है और उनकी सेवाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं।
शाह ने बताया कि पहली बार, मामूली अपराधों के लिए सजा के एक कानूनी रूप के रूप में सामुदायिक सेवा को पेश किया गया है, और आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें देश से भागने वाले भगोड़ों के लिए अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधान हैं।
शाह ने यह भी कहा कि सात साल से अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए अब फोरेंसिक जांच अनिवार्य है, और भारत के बाहर रहने वाले घोषित अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने के प्रावधान किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, नए कानूनों में अभियोजन निदेशक को अधिक महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने के लिए दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार किया गया है।
गृह मंत्री ने दिल्ली पुलिस की कई नयी पहलों की भी शुरुआत की, जिनमें विशेष प्रकोष्ठ के लिए एक एकीकृत मुख्यालय और 'सेफ सिटी' परियोजना का पहला चरण शामिल है।
भाषा नोमान रंजन
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